क्या सार्वजनिक माफी मांगेंगे ठाकरे
नईदिल्ली। दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। दिशा के पिता सतीश सालियन ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी (शरद गुट) के नेता तथा महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं ने सतीश सालियन की बेटी की मौत की जांच और न्याय की उनकी मांग को राजनीति से प्रेरित बताने की कोशिश की। 28 वर्षीय दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची रिहायशी इमारत से गिरने के बाद हुई थी। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे दुर्घटना माना और एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके छह दिन बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हो गई। इसके बाद दिशा के पिता सतीश सालियन ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख करते हुए एफआईआर दर्ज करने और मामले की नए सिरे से जांच की मांग की।
याचिका में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली समेत कई लोगों से जुड़े आरोपों की जांच की मांग की गई थी। हालांकि, इससे पहले सतीश सालियन यह कह चुके थे कि उन्हें अपनी बेटी की मौत में किसी आपराधिक पहलू का संदेह नहीं था। कानूनी नोटिस में सतीश सालियन ने आरोप लगाया है कि आदित्य ठाकरे ने उनकी न्याय की लड़ाई को राजनीति से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के मकसद से चलाया जा रहा अभियान बताने की कोशिश की।
नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के आरोप सतीश सालियन की ईमानदारी, विश्वसनीयता और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उनके अनुसार, एक दुखी पिता को ऐसा व्यक्ति बताने की कोशिश की गई जो अपनी बेटी की मौत की कानूनी जांच की मांग के पीछे राजनीतिक उद्देश्य रखता है। नोटिस में ठाकरे पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उन्होंने यह गलत धारणा बनाने की कोशिश की कि केंद्रीय जांच ब्यूरो पहले ही दिशा सालियन मामले की जांच कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है।
नोटिस में 23 मार्च 2025 को अनिल देशमुख के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, देशमुख ने दिशा सालियन मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था। नोटिस में दावा किया गया है कि इस बयान को व्यापक प्रचार मिला, जिससे सतीश सालियन की छवि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश हुई, जो कथित तौर पर राजनीतिक मकसद से आपराधिक न्याय प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहा है।
कानूनी नोटिस में इन आरोपों को झूठा, बेबुनियाद, गैर-जिम्मेदाराना और गंभीर रूप से मानहानिकारक बताया गया है। सतीश सालियन ने दोनों नेताओं से बिना शर्त, स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने के साथ-साथ उसे प्रमुख प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित तथा प्रसारित करने की मांग की है। नोटिस के अनुसार, वीडियो के माध्यम से दी जाने वाली माफी कम से कम तीन मिनट की होनी चाहिए और इसे दोनों नेताओं के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया जाना चाहिए। इसके अलावा, 500 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।
सीबीआई की ओर से मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के दो दिन बाद आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा, ‘मैं दिशा सालियन से कभी नहीं मिला, न ही मैं उन्हें जानता था।’ ठाकरे ने यह भी कहा कि करीब छह वर्षों से इस मामले में उनका नाम जोड़ऩा उन्हें बदनाम करने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने इसे राजनीतिक और व्यक्तिगत मकसद से की जा रही बिना सबूत की कार्रवाई बताया। हालांकि, अपनी पोस्ट में उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया।







