जगदलपुर। केंद्रीय जेल में शुक्रवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जो आमतौर पर जेल परिसरों में देखने को नहीं मिलता। दुष्कर्म के आरोप में पिछले सात महीने से न्यायिक हिरासत में बंद एक विचाराधीन कैदी ने अपनी प्रेमिका के साथ जेल परिसर में सात फेरे लिए।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आरोपी के खिलाफ युवती के परिजनों ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी जेल में था, लेकिन इस दौरान युवती लगातार उससे मिलने आती रही। बाद में दोनों ने अपनी इच्छा से शादी करने का फैसला लिया और अदालत से अनुमति मांगी।
दुष्कर्म केस के बीच जेल में शादी कैसे ?
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी सुरेश सेठिया और मनमती कश्यप के बीच करीब तीन साल से प्रेम संबंध था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवारों की सहमति नहीं मिलने के कारण विवाद बढ़ गया। इसी बीच युवती के परिजनों ने बोधघाट थाने में शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने सुरेश को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल भेज दिया।
जेल में रहने के दौरान भी दोनों का संपर्क बना रहा। युवती नियमित रूप से मुलाकात के लिए जेल पहुंचती थी। बाद में दोनों ने आपसी सहमति से विवाह करने का फैसला किया। आरोपी ने जेल प्रशासन को अपनी इच्छा बताई, जिसके बाद वकीलों के जरिए अदालत में हलफनामा पेश किया गया। अदालत ने यह देखते हुए कि दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं, जेल नियमावली के तहत शादी की अनुमति दे दी।
कोर्ट की अनुमति के बाद भी केस रहेगा जारी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी विचाराधीन कैदी को विवाह करने से कानून नहीं रोकता, बशर्ते अदालत और जेल प्रशासन से जरूरी अनुमति मिल जाए, लेकिन यदि किसी व्यक्ति पर दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप हैं, तो शादी हो जाने मात्र से मामला अपने आप खत्म नहीं हो जाता। अदालत उपलब्ध सबूतों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम फैसला सुनाती है।
जेल प्रशासन के अनुसार, इस मामले में दोनों पक्षों से लिखित सहमति ली गई थी। इसके बाद पूरी फाइल अदालत भेजी गई और आदेश मिलने के बाद विवाह कराया गया। समारोह के दौरान सुरक्षा और जेल नियमों का पूरा पालन किया गया, वहीं वकीलों का कहना है कि दोनों के बीच पहले से प्रेम संबंध थे और दोनों अपनी मर्जी से शादी करना चाहते थे, इसलिए कानूनी प्रक्रिया अपनाकर अनुमति ली गई।







