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छत्तीसगढ़

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में एक्शन, सौम्या चौरसिया की बेल पिटीशन पर प्राथमिकता से सुनवाई

बिलासपुर। बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया की दो ताजा जमानत याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार से 20 फरवरी 2026 तक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दायर इन याचिकाओं ने छत्तीसगढ़ की सियासत और कानूनी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

6 बार गिरफ्तारी और ‘राजनीतिक षडयंत्र’ की दलील

सुनवाई के दौरान सौम्या चौरसिया के वकीलों ने अदालती कार्यवाही में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उनके वकील मुकुल रोहतगी ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि सौम्या को अब तक 6 बार हिरासत में लिया जा चुका है। दलील दी गई कि जब भी एक मामले में राहत की उम्मीद होती है, एजेंसियां नई एफआईआर दर्ज कर फिर से गिरफ्तार कर लेती हैं। चौरसिया पक्ष का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई एक “राजनीतिक षडयंत्र” का हिस्सा है और उन्हें जानबूझकर लंबे समय तक सलाखों के पीछे रखने की कोशिश की जा रही है।

“माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी को स्पष्ट निर्देश दिया था कि हाईकोर्ट इन याचिकाओं पर प्राथमिकता से सुनवाई करे। हमने कोर्ट को बताया है कि बार-बार नई गिरफ्तारियां कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं।”
सौम्या चौरसिया के विधिक सलाहकार

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