अंबिकापुर जिले के सिद्धार्थ अस्पताल में साढ़े तीन वर्ष के बच्चे को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने अस्पताल की फार्मेसी को 15 दिन के लिए सील कर दिया है।
मामले की शिकायत बच्चे के पिता ने कलेक्टर से की थी। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को अस्पताल की फार्मेसी में उसी बैच के तीन और एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल बरामद हुए हैं। फार्मेसी संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
कलेक्टर अजीत वसंत ने तत्काल सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीएस मार्को को जांच का जिम्मा सौंपा। सीएमएचओ के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पीके सिन्हा और ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा की टीम अस्पताल पहुंची। टीम ने फार्मेसी में रखी दवाओं के स्टॉक की पड़ताल की, तो उसी बैच के तीन और एक्सपायर्ड इंजेक्शन वायल पाए गए, जिसका इंजेक्शन बच्चे को लगाया गया था। इस पर ड्रग इंस्पेक्टर अनिल पैकरा ने फार्मेसी को सील कर दिया और संचालक से स्पष्टीकरण मांगा है।
पूरे प्रकरण में तीन स्तरों पर भारी लापरवाही सामने आई है। जब डॉक्टर ने पर्ची लिखी तो फार्मासिस्ट ने बिना जांच किए एक्सपायर्ड दवा बेच दी। दूसरी चूक बच्चे के पिता से हुई, जिन्होंने दवा खरीदते समय उसकी वैधता तिथि नहीं देखी। तीसरी और सबसे बड़ी लापरवाही इलाज करने वाले डॉक्टर या नर्स के स्तर पर हुई, जिन्होंने बच्चे को इंजेक्शन लगाने से पहले एक्सपायरी तिथि की जांच करना जरूरी नहीं समझा।







