570 करोड़ के घोटाले का खुलासा, ईओडब्ल्यू इसकी समीक्षा कर रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी
रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए कोल लेवी घोटाले में 10 वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (आईपीएस एक्ट), 1988 के उल्लंघन के आधार पर करने की बात कही गई है। घोटाले की कुल राशि लगभग ₹570 करोड़ आंकी गई है। ईडी की जांच के अनुसार, इस अवैध वसूली में राजनीतिज्ञों, अधिकारियों, व्यापारियों और दलालों का गठजोड़ काम कर रहा था, जो रोज़ाना ₹2-3 करोड़ की अवैध कमाई करता था।
कैसे हुआ घोटाला?
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 में तत्कालीन खान संचालक आईएएस समीर विश्नोई के आदेश से कोल ट्रांसपोर्ट परमिट की ऑनलाइन प्रणाली को ऑफलाइन कर दिया गया। इस बदलाव का फायदा उठाकर प्रति टन ₹25 की अवैध लेवी वसूली जाने लगी।
प्रमुख आरोपी और नाम
घोटाले के मुख्य आरोपी व्यापारी सूर्यकांत तिवारी को ईडी ने ‘मास्टरमाइंड’ बताया है। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। अन्य प्रमुख नामों में शामिल हैं, आईएएस समीर विश्नोई (तत्कालीन माइंस डायरेक्टर), आईएएस रानू साहू (तत्कालीन कोरबा कलेक्टर) और सौम्या चौरसिया (तत्कालीन उप सचिव, सीएम कार्यालय) शामिल है। इन तीनों अधिकारियों के साथ अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के भी शामिल होने की बात ईडी ने कही है, हालांकि उनके नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अब तक की कार्रवाई
ईडी ने इस घोटाले में ₹150 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की है, जिसमें अचल संपत्ति, लग्ज़री वाहन, सोना-चांदी और नकदी शामिल हैं। रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई है। मुख्य सचिव ने कहा है कि, ईडी की सिफारिश प्राप्त हो गई है। ईओडब्लयू इसकी समीक्षा कर रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घोटाला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामने आया था, जब ईडी ने रायपुर, कोरबा और दुर्ग समेत कई जगहों पर छापेमारी की थी। उस समय के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया था। अब, भाजपा सरकार के कार्यकाल में ईडी की सिफारिश पर कार्रवाई को लेकर जनता और राजनीतिक हलकों में बड़ी उम्मीद देखी जा रही है।







