बिलासपुर। संविदा नियुक्त एक महिला आयुर्वेदिक डॉक्टर की नियमितीकरण की मांग को लेकर दायर याचिका मामले में हाईकोर्ट ने अपना ही आदेश वापस ले लिया है। दरअसल, मामले में याचिकाकर्ता महिला डॉक्टर ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष एक सर्कुलर पेश किया। बाद में पता चला कि सर्कुलर पूरी तरह फर्जी था।
महिला डॉक्टर को अपनी गलती का अहसास हुआ और कोर्ट में एक रिव्यू पिटिशन दायर करते हुए कोर्ट से माफी मांगी,जिसपर कोर्ट ने अपना पुराना आदेश वापस लेते हुए याचिका पर सुनवाई के लिए उसे दुबारा बहाल किया । बता दें कि बलौदाबाजार-भाटापारा के मोपका प्राथमिक स्वास्थ्य आयुष केंद्र में संविदा पर कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ.ममता मिश्रा ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।
दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने 28 मई 2010 को जारी सरकारी सर्कुलर पेश किया,इसमें संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार करने के निर्देश दिए गए थे। याचिका में सेवाकाल के 18 साल पूरा करने की बात कही गई,लिहाजा नियमितीकरण के लिए खुद को पात्र बताया ।
हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए बीते 5 जनवरी को याचिकाकर्ता को नए सिरे से अभ्यावेदन करने और संबंधित अधिकारियों को 4 महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश जारी किया था । इधर कोर्ट के निर्णय के बाद पता चला कि पेश किया गया सर्कुलर ही फर्जी है । बाद में महिला डॉक्टर ने अपनी चूक स्वीकारते हुए हाईकोर्ट में रिव्यू पिटिशन दायर की । हाईकोर्ट ने केस को दुबारा बहाल कर दिया है,जिससे याचिकाकर्ता को मिली अंतरिम राहत खत्म हो गई है।







