Home » 3.85 लाख रूपये की ठगी: लुधियाना में कपड़ा कारोबारी से हुई थी मुलाकात
कोरबा • छत्तीसगढ़

3.85 लाख रूपये की ठगी: लुधियाना में कपड़ा कारोबारी से हुई थी मुलाकात

चिकित्सालय में आपात स्थिति का दिया हवाला

कोरबा। साइबर ठग अब लोगों को झांसा देने के लिए केवल अनजान नंबरों का सहारा नहीं ले रहे, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर परिचितों के नाम का भ्रम पैदा कर विश्वास जीतने की नई तरकीब अपना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कोरबा में सामने आया है, जहां लुधियाना में कपड़े के कारोबार के सिलसिले में मिले एक व्यक्ति का नाम मोबाइल पर देखकर सेवानिवृत्त एसईसीएल कर्मी ने फोन करने वाले को अपना परिचित समझ लिया। चिकित्सालय में आपात स्थिति का हवाला देकर मदद मांगने वाले साइबर ठग की बातों में आकर उन्होंने अलग-अलग किस्तों में कुल 3 लाख 85 हजार रुपये गंवा दिए।

पुलिस के अनुसार, आर.पी. नगर फेस-2 निवासी 61 वर्षीय व्यक्ति एसईसीएल से सेवानिवृत्त हैं। वे सेवानिवृत्ति के बाद कपड़े का व्यवसाय शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में करीब 15 दिन पहले कपड़ों की खरीदारी के लिए लुधियाना गए थे। वहां उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई थी। शिकायत के मुताबिक, 18 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। स्क्रीन पर फोन करने वाले का नाम सौरभ प्रदर्शित हो रहा था। इससे उन्हें लगा कि लुधियाना में मिला व्यापारी ही फोन कर रहा है। कॉल करने वाले ने चिकित्सालय में आपात स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि पैसे भेजने के दौरान गलती से उसकी रकम उनके खाते में चली गई है। उसने तत्काल रकम वापस करने की गुहार लगाई। परिचित समझकर वे उसकी बातों में आ गए। बैंक खाते में बैलेंस दिखाई नहीं देने पर उन्होंने पीएफ संबंधी प्रक्रिया के कारण ऐसा होने की आशंका जताई और बताए गए तरीके से फोन पे के जरिए रकम भेजनी शुरू कर दी।

अगले दिन भी फोन कर ठग ने चिकित्सा और आर्थिक परेशानी का हवाला देकर पैसे मांगे। इस तरह 18 से 22 अक्टूबर के बीच अलग-अलग बैंक लेन-देन से 3.85 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसमें पत्नी के खाते से भेजे गए 20 हजार रुपये भी शामिल हैं। बाद में पत्नी ने ठगी की आशंका जताई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। उनकी रिपोर्ट पर पुलिस ने मोबाइल नंबर के धारक के विरुद्ध धारा 318(4) और 319(2) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।