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मणिपुर में नगा-कुकी तनाव से बिगड़े हालात, 7 दिन से स्कूल और बाजार बंद

4 दिनों में 6 मौतों का दावा?

मणिपुर। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में नगा और कुकी समुदायों के बीच बढ़े तनाव का असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। कई इलाकों में करीब एक सप्ताह से स्कूल और बाजार बंद हैं। सड़क़ों और हाईवे पर जगह-जगह रुकावटों के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। जरूरी सामान की सप्लाई भी बाधित होने से कुछ इलाकों में सामान महंगा मिल रहा है।

कांगपोकपी के कुछ गांवों में स्थानीय लोगों के मुताबिक चीनी की कीमत 400 से 450 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि कई लोग घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं। ग्रामीणों के लिए खेतों तक जाना भी मुश्किल हो गया है। मेडिकल जरूरत होने पर अस्पताल या एयरपोर्ट तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल को नगा बहुल जिले बताया गया है। वहीं चूराचांदपुर, कांगपोकपी और फिरजॉल में कुकी आबादी अधिक है।

कांगपोकपी समेत चार जिलों में दोनों समुदायों की आबादी मौजूद है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रमुख सडक़ों और हाईवे पर कई स्थानों पर नाकेबंदी की गई है। कुछ जगहों पर चेक पॉइंट भी बनाए गए हैं। लोगों के अनुसार सुरक्षा एस्कॉर्ट के बिना निजी वाहनों से यात्रा करना आसान नहीं है। कांगपोकपी की 53 वर्षीय मार्गरेट के अनुसार जिला मुख्यालय में रहने की वजह से उन्हें किसी तरह जरूरी सामान मिल रहा है, लेकिन गांवों की स्थिति ज्यादा कठिन है।

उनके मुताबिक कुछ स्थानों पर चीनी 400 से 450 रुपए किलो तक मिल रही है। 35 वर्षीय डेविड ने बताया कि ग्रामीण खेतों में जाने से भी डर रहे हैं। उनका कहना है कि अचानक गोलीबारी की आशंका के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे। उनके मुताबिक मेडिकल इमरजेंसी या एयरपोर्ट जाने के लिए कुछ जगहों पर नगा समुदाय के सब-डिविजनल ऑफिसर से अनुमति लेनी पड़ रही है। कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में बुधवार को कई घरों में आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ मकानों पर गोलियां चलने की भी बात कही गई है। वहां की दीवारों पर गोलियों के निशान दिखाई देने की जानकारी दी गई।

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