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बंगाल में राजनीतिक घमासान: ‘सलाम’ और ‘इंशाअल्लाह’ कहने पर घिरीं आईपीएस बुशरा बानो

विपक्ष ने धार्मिक भेदभाव का आरोप लगाया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की 2021 बैच की मुस्लिम आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो के अचानक तबादले ने राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। खड़गपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात बानो को सोमवार को स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर भेज दिया गया।

यह तबादला उस यूट्यूब वीडियो के एक दिन बाद हुआ, जिसमें उन्होंने छात्रों को सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रेरित करते हुए ‘अस्सलाम अलैकुम’, ‘इंशाल्लाह’ और ‘जजाकल्लाह’ जैसे इस्लामी अभिवादन का इस्तेमाल किया था। दक्षिणपंथी संगठन हिंदू लीगल फंड ने शिकायत की कि एक सरकारी अधिकारी को ‘वंदे मातरम’ या ‘जय हिंद’ कहना चाहिए था। सोशल मीडिया पर कुछ खातों ने उन्हें ‘यूपीएससी जिहाद’ का आरोप भी लगाया।

विपक्षी नेताओं ने उठाए सवाल

सरकार ने इसे नियमित तबादला बताया है, लेकिन विपक्ष ने धार्मिक भेदभाव और नफरत का आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने लिखा कि जिस देश के प्रधानमंत्री ने नए संसद का उद्घाटन सेंगोल और नंगे बदन साधुओं के साथ किया, वहां ‘अस्सलाम अलैकुम’ कहने पर मुस्लिम आईपीएस अधिकारी का तबादला बेतुका है। हम नफरत और कट्टरता से जहरीले हो चुके हैं। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आईपीएस एसोसिएशन से मामले पर ध्यान देने की अपील की, जबकि तेलंगाना के मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इसे अल्पसंख्यकों के लिए गलत संदेश बताया। तेलंगाना के पूर्व मंत्री और भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इसे बेहद चिंताजनक घटनाक्रम करार दिया।

दो बार यूपीएससी में सफल हुईं बुशरा

उत्तर प्रदेश के कन्नौज की रहने वाली बुशरा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पीएचडी की है और सऊदी अरब के एक विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर चुकी हैं। देश लौटने के बाद उन्होंने कोल इंडिया में नौकरी की और वहीं रहते हुए यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय रेल यातायात सेवा में काम किया।

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