बिलासपुर। शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने पूरी तरह से गैरकानूनी करार दिया है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने रायपुर नगर निगम की इस कार्रवाई को अवैध ठहराया। हालांकि, अदालत ने 12 साल पहले नियुक्त हो चुके 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त नहीं की हैं। इस लापरवाही के चलते मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलने वाली महिला अभ्यर्थी को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश रायपुर नगर निगम आयुक्त को दिया गया है।

शिक्षक भर्ती में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : महिला आरक्षित पदों पर पुरुषों की नियुक्ति को बताया गैरकानूनी, 3 लाख रूपए मुआवजा देने का आदेश
मामले में रायपुर नगर निगम ने अपने बचाव में वर्ष 1997 के एक सर्कुलर का हवाला दिया था। नगर निगम का कहना था कि योग्य महिला उम्मीदवार न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर पाई थीं, जिसके कारण ये पद उसी वर्ग के पुरुषों से भरे गए थे। हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी वैधानिक नियम के महिलाओं के आरक्षित पदों को किसी अन्य वर्ग में बदलना पूरी तरह से गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने माना कि नगर निगम की गलती के कारण याचिकाकर्ता को वर्ष 2014 में नियुक्ति नहीं मिल सकी थी।
अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता को बाद में गणित शिक्षिका के पद पर नियुक्ति मिल गई थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने 12 साल पहले नियुक्त हो चुके 12 पुरुष शिक्षकों की सेवाएं समाप्त नहीं कीं। हालांकि, इस प्रशासनिक लापरवाही के कारण याचिकाकर्ता को जो मानसिक और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, उसकी भरपाई के लिए मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया। हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को याचिकाकर्ता नम्रता देवांगन को तीन लाख रुपये की राशि का भुगतान करने का स्पष्ट आदेश दिया है।






