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राजस्थान

स्विट्जरलैंड जैसा खूबसूरत, लेकिन खतरनाक है किशनगढ़ का स्नो यार्ड, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

जयपुर। अजमेर जिले के किशनगढ़ में फैला मार्बल वेस्ट का डंपिंग यार्ड दूर से किसी बर्फीले पर्यटन स्थल जैसा लगता है। यहां न तो देवदार के पेड़, न ही ठंडी हवा, फिर भी दृश्य गुलमर्ग या स्विट्जरलैंड जैसा लगता है, लेकिन हकीकत में यह एशिया का सबसे बड़ा मार्बल वेस्ट डंपिंग यार्ड है। यह विषाक्त पर्यटन स्थल इन दिनों पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

इस स्नो यार्ड को देखने और फोटो शूट करवाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लोग किशनगढ़ पहुंचते हैं। स्थानीय युवा भी आपदा में अवसर की तर्ज पर बाहर से आने वाले लोगों को यहां की सैर करवा कर पैसे कमा रहे हैं। किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन द्वारा विकसित करीब 312 एकड़ में फैले इस डंपिंग साइट पर हर दिन 700 से ज्यादा टैंकर लगभग 22 लाख लीटर मार्बल स्लरी (कीचड़) खाली करते हैं। यहां रोजाना करीब 5,000 पर्यटक आते हैं, जबकि सप्ताह के अंतिम दिनों और छुट्टियों में यह संख्या 20,000 तक पहुंच जाती है। सफेद चमकदार सतह के कारण यह जगह प्री-वेडिंग और फोटो शूट के लिए भी पसंदीदा बन चुकी है।

राजथान केंद्रीय विश्विघालय के वैज्ञानिक अध्ययनों में इसे विषाक्त पर्यटन स्थल बताया गया है। पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर लक्ष्मी कांत शर्मा के अनुसार, यहां न तो कोई लाइनिंग सिस्टम है, न धूल नियंत्रण, न ही हवा और भूजल की नियमित मानिटरिंग होती है। इसका परिणाम यह हुआ कि आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण, कृषि भूमि की गुणवत्ता में गिरावट और हवा में धूल कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। इस मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने भी संज्ञान लेते हुए एक संयुक्त समिति गठित की है।

सवाई मानसिंह अस्पताल के अतिरिक्त नियंत्रक डॉ. अजीत सिंह ने कहा कि यह स्लरी मानव स्वास्थ्य, कृषि भूमि एवं भूजल के लिए बेहद खतरनाक है। मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर जैन ने बताया कि आगामी समय में इसे इको फ्रेंडली डंपिंग यार्ड बनाया जाएगा है। यहां कई गायक बादशाह, कपिल शर्मा, टाइगर श्राफ, सोनाक्षी सिन्हा सहित कई कलाकार शूटिंग करवा चुके हैं।

प्री वेडिंग शूट के लिए 5,100 रुपये और व्यावसायिक शूटिंग के लिए 21 हजार रुपये प्रतिदिन लिया जाता है। वर्ष 1980 मार्बल इकाईयों के मालिकों के सामने समस्या हुई कि स्लरी को वे कहां एकत्रित करें। सरकार से कोई मदद नहीं मिल सकी तो उन्होंने किसानों से जमीन खरीदी और वहां डंपिंग यार्ड बना दिया। यह डंपिंग यार्ड अब पर्यटन स्थल बन गया।

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