उदयपुर। चित्रकूट नगर स्थित सरकारी बालिका गृह में एक 19 वर्षीय युवती ने आरोप लगाया है कि नाबालिग रहने के दौरान एक डॉक्टर ने उसका यौन शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। युवती ने बालिका गृह की महिला स्टाफ और सीडब्ल्यूसी सदस्य को भी बताया, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। महिला कर्मचारी पर गर्भपात कराने का आरोप है। बालिग होते ही पीड़िता ने महाराष्ट्र के रायगढ़ में जीरो एफआईआर दर्ज कराई, जिसे उदयपुर ट्रांसफर कर सुखेर थाने में 18 जुलाई को केस दर्ज किया गया।
पुलिस के अनुसार यह घटना 2022 से जून 2025 के बीच तब हुईं जब वह सरकारी संरक्षण में थी। उसने बालिका गृह की महिला स्टाफ और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के एक सदस्य को इस बारे में कई बार बताया, मगर किसी ने सुनवाई नहीं की।
महिला कर्मचारी पर गर्भपात कराने का आरोप
युवती का आरोप है कि गर्भवती होने पर एक महिला कर्मचारी ने उसे गर्भपात की किट देकर जबरन गर्भपात करवाया। एफआईआर में डॉक्टर अरविंद, किरण, पुष्पा और यशोदा के नाम दर्ज हैं। हालांकि सीडब्ल्यूसी की कार्यवाहक अध्यक्ष यशोदा पणिया ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि हमारे यहां इस नाम का कोई डॉक्टर नहीं है।
स्वास्थ्य जांच सीसीटीवी कैमरे वाली जगहों पर होती है और बालिकाओं को समूहों में भेजा जाता है, ऐसे में किसी एक के साथ अलग घटना की संभावना नहीं है। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक केके चंद्रवंशी ने बताया कि युवती 1 जून को बालिग हुई और 2 जून को उसे संस्थान से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुरुष केयरटेकर की मौजूदगी पर सवाल
एक चिंताजनक तथ्य यह भी है कि जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है, वहां राजपाल नाम का पुरुष केयरटेकर वर्षों से सेवा दे रहा है। यह नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। सुखेर थानाधिकारी रविंद्र चारण ने बताया कि पीड़िता को रायगढ़ से बुलाया गया है, सोमवार को उसका बयान दर्ज किया जाएगा।
पुलिस पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। रविवार को जिला कलेक्टर नमित मेहता ने भी बालिका गृह का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की। मामला मीडिया में आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और सभी संबंधित पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।







