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कोरबा

एसईसीएल की खदान में ब्लास्टिंग से दहशत, मकान का गिरा छप्पर

कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा खदान से प्रभावित बरपाली गेवरा बस्ती दशहरा मैदान क्षेत्र में रहने वाले लोगों को दहशत के बीच जीवन यापन करना पड़ रहा है। खदान में हो रही ब्लास्टिंग का असर मकानों पर पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खदान में ब्लास्टिंग से पहले सायरन नहीं बजाया जाता। उन्हें इसकी जानकारी तब होती है, जब ब्लास्टिंग की आवाज सुनाई देती है या फिर उनके घरों में कंपन का एहसास होता है। खदान के मुहाने से महज 100 मीटर की दूरी पर ही उनकी बस्ती बसी हुई है। ऐसे में धूल के गुबार से बस्ती में गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। हैवी ब्लास्टिंग से एक मकान का छप्पर टूटकर गिर गया।एसईसीएल की खुली खदानों में कोयला खनन या फिर मिट्टी हटाने के लिए ब्लास्टिंग की जाती है। उसके बाद मशीनों से खनन होता है। बुधवार की शाम करीब 4 बजे एसईसीएल कुसमुंडा खदान से प्रभावित बरपाली गेवरा बस्ती में रहने वाले हरिदास के मकान का छप्पर भरभराकर गिर गया। उसकी पत्नी उमेंद बाई ने बताया कि खदान में हो रही हैवी ब्लास्टिंग से उनके मकान का छप्पर गिरा है। यहां रहने वाले लोगों की मकानों में दरारें भी आ गई है। एसईसीएल कुसमुंडा खदान से प्रभावित गांव पाली व पड़निया के भूविस्थापित भी हैवी ब्लॉस्टिंग की शिकायत कर चुके हैं। इन दोनों गांवों के नजदीक ही खदान है। यहां के भूविस्थापितों ने बताया कि अब तक बसाहट, मुआवजा समेत रोजगार की मांग पूरी नहीं हो सकी है। गांव में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रबंधन के साथ 4 मांगों को लेकर चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक निराकरण नहीं हो सका है।

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