सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा का आज तीसरा दिन है। व्रती महिलाएं आज शाम नदी, तालाबों में डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे। हर साल कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को इस पर्व की शुरुआत होती है। छठ पूजा षष्ठी देवी और सूर्य भगवान को समर्पित है।
छठी मैया को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। सनातन धर्म में छठी मैया संतान सुख देने वाली और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि करने वाली मानी गई हैं। छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा राज्यों का प्रमुख पर्व है।
वहीं, अब इन जगहों से जुड़े लोग देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं, जिसके कारण लोक आस्था से जुड़ा यह पर्व देश के कोने-कोने में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ पर्व के आते ही देश भर की पवित्र नदियों और जलाशयों के घाट पर छठी माता के गीत गुंजायमान होने लगते हैं। मान्यता है कि छठ पूजा के दिन विधि-विधान से छठी देवी की पूजा करने पर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और देवी से संतान की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। यहां पढ़िए छठी मैया का गुणगान करने वाली आरती।
छठ मईया की आरती
ॐ जय छठी माता,
मैया जय छठी माता, तुम संतन हितकारी, टूटे न ये नाता।।
ॐ जय छठी माता कार्तिक षष्ठी को मैया,
व्रत तेरा आता, निर्जला व्रत जो रखता, फल उत्तम पाता।।
ॐ जय छठी माता चतुर्थी के दिन पावन, नहाय खाय आता,
बाद दिवस जो आये, खरना कहलाता।।
ॐ जय छठी माता ठेकुआ, नारियल, फल से सूप भरा जाता,
डलिया माथे सजाके, घाट पे जग जाता।।
ॐ जय छठी माता संध्या को जल में खड़े हो,
अर्घ्य दिया जाता, प्रात अर्घ्य से छठ व्रत, संपन्न हो जाता।।
ॐ जय छठी माता छठी मैया की आरती जो कोई नर गाता,
मैया जो कोई जन गाता, दुःख दारिद्रय हैं मिटते, संकट टल जाता।।
ॐ जय छठी माता ॐ जय छठी माता, जय जय छठी माता,
तुम संतन हितकारी, टूटे न ये नाता।।
बोलिये छठी मैया की जय







