नईदिल्ली। डीआरडीओ ने शुक्रवार शाम को ओडिशा तट से परमाणु-सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का पहला परीक्षण किया। टीओआई के अनुसार, यह परीक्षण-लॉन्च अग्नि-6 मिसाइल जैसा नहीं दिखता है, लेकिन आज जिस मिसाइल का परीक्षण किया गया है वह आईसीबीएम श्रेणी की है। हालांकि, डीआरडीओ ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मिसाइल परीक्षण की घोषणा नहीं की है। केवल चार देशों अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास आईसीबीएम तकनीक है और उन्होंने 12,000 किमी से अधिक की रेंज वाले आईसीबीएम तैनात किए हैं।
फ्रांस और ब्रिटेन के पास ऑपरेशनल परमाणु-हथियार संपन्न पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (एसएलबीएम) तकनीक है। यदि भारत आईसीबीएम क्षमता हासिल कर लेता है, तो अमेरिका सहित दुनिया का कई देश मिसाइल की मारक क्षमता में आ जाएगा। यह लॉन्च डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत के एक रक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान अग्नि-6 के बारे में दिए गए उस बयान के कुछ दिनों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जैसे ही सरकार अनुमति देती है, हम आगे बढने के लिए तैयार हैं। सभी तकनीकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
पिछले बुधवार को, भाजपा ने भी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अग्नि-6 के लॉन्च पर एक बड़ा संकेत दिया था। 10,000़ किमी की मारक क्षमता और एमआईआरवी (एमआईआरवी) तकनीक के साथ, अग्नि-6 इतिहास रचने के लिए तैयार है। यह मिसाइल भारत की सुरक्षा को अभेद्य बनाएगी और हमें दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की लीग में स्थापित करेगी।
भाजपा ने एक वीडियो भी अपलोड किया था, जिसमें बताया गया था कि अब तक केवल पांच देशों अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की शक्ति है। अब, भारत भी इसी लीग में अपनी स्थिति मजबूत करने जा रहा है। लंबी दूरी की मारक क्षमता के साथ, भारत की पहुंच अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि और अधिक वैश्विक होने जा रही है।
परमाणु-सक्षम आईसीबीएम तकनीक होने का मतलब परमाणु हमले का जवाब देने की क्षमता है, जिससे दुनिया के किसी भी देश को पहले हमला करने से रोका जा सकता है। यह जटिल रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस सिस्टम और री-एंट्री तकनीक में महारत को भी प्रदर्शित करता है।







