नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस में उभरे बगावत के सुर अब पार्टी के संसदीय दल के भीतर भी सुनाई देने लगे हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी TMC सांसद शताब्दी रॉय के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे हैं। इससे पहले टीएमसी सांसद जून मालिया भी शताब्दी रॉय के आवास पर पहुंची थीं।
टीएमसी के संसदीय दल में बगावत का ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी दिल्ली में भाजपा के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल हुई थीं। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले ममता बनर्जी ने पार्टी के तमाम सांसदों की नाराजगी दूर करने के लिए उनके साथ बैठक भी की थी।
राज्यसभा में भी लगा टीएमसी को झटका : इससे पहले दिन में ही राज्यसभा में टीएमसी के पूर्व मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर रॉय ने सांसद पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी और टीएमसी पर कई गंभीर आरोप लगाए। पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को आरजी कर मामले को लेकर टीएमसी की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य नेतृत्व जमीनी हकीकतों से कट गया है।
ममता बनर्जी पर भी साधा निशाना : अपने पद से इस्तीफा देने के बाद रॉय ने कहा, “सत्ता उनके सिर पर इस हद तक चढ़ गई थी कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई भी उन्हें छू नहीं सकता।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पंद्रह वर्षों से सत्ता में काबिज मंत्री, पंचायत नेता, पार्षद और महापौर लोगों की पहुंच से बाहर हैं, जबकि जमीनी स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है।
काकोली घोष के किस दावे से बढ़ी दीदी की चिंता? : वहीं, तृणमूल के बागी गुट का नेतृत्व कर रही काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए को समर्थन देने का एलान किया है। वहीं, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने इन दावों पर कहा कि टीएमसी के केवल 13 सांसदों ने भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की थी।
टीएमसी ने पलटवार में क्या कहा? : टीएमसी के लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद और पार्टी नेता कुणाल घोष ने इन दावों को फर्जी और जनता को धोखा देने वाला करार दिया है। मुख्य सचेतक के पद पर विवाद को लेकर कीर्ति आजाद ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार खुद को मुख्य सचेतक बताकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिख रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले महीने ही पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को काकोली घोष दस्तीदार को हटाकर कल्याण बनर्जी को मुख्य सचेतक नियुक्त किए जाने की सूचना दे दी थी।
‘जो कल तक लेते थी दीदी का नाम, आज NDA में जाने की बात कर रहे’ : कुणाल घोष
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों ने टीएमसी का टिकट ‘दीदी’ (ममता बनर्जी) के नाम पर और उनके चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करके जीता है, वे कुछ दिन पहले तक ‘दीदी, दीदी, दीदी’ का नारा लगा रहे थे। अब उनका अचानक एनडीए के साथ जुड़ने की बात करना उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। कुणाल घोष ने कहा कि जनता ऐसे राजनीतिक चालों को पसंद नहीं करती और इसे उनके जनमत का अपमान मानती है।
ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए क्यों बड़ा झटका?
पश्चिम बंगाल में पहले ही करीब 58 विधायकों ने पार्टी से अलग होकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वहीं, अब दिल्ली में ममता बनर्जी की मौजदूगी के बीच टीएमसी सांसदों का एनडीए को समर्थन देने का एलान पार्टी पर दीदी की कमजोर होती पकड़ को दिखा रहा है। संसदीय दल में बगावत का यह गणितीय समीकरण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
टीएमसी के वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बशीरहाट के सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली है। 20 सांसदों का समर्थन दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई सीमा को आराम से पार कर जाएगा। यह घटनाक्रम असंतुष्ट सांसदों द्वारा नई दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक करने के एक दिन बाद आया है और यह पार्टी नेतृत्व के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर पकड़ पर सवाल उठाता है।







