पदकों से भरा रहा शानदार सफर, 15 कॉमनवेल्थ मेडल जीतने वाला सितारा बुझा
नई दिल्ली। भारतीय खेल जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। देश के सबसे सफल और सम्मानित निशानेबाजों में शामिल जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जर्मनी से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद दिल्ली में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
28 जून 1976 को उत्तराखंड के एक गढ़वाली परिवार में जन्मे जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया था। महज 12 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले राणा ने आगे चलकर भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। उन्होंने कुल 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। 2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में छह पदक जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया था।
15 कॉमनवेल्थ मेडल जीतने वाला सितारा बुझा
एशियन गेम्स में भी उनका दबदबा कायम रहा। 2006 दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री और बाद में कोचिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। खिलाड़ी के रूप में सफल करियर के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग को अपना मिशन बनाया।
उन्होंने भारतीय निशानेबाजी की नई पीढ़ी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर सहित कई युवा खिलाड़ियों को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में अहम योगदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। जसपाल राणा का जाना केवल एक खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय शूटिंग के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है।







