राज ठाकरे की पार्टी मनसे के नेताओं पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इन लोगों पर मराठी भाषा के मुद्दे पर हंगामा करने का आरोप है। ये मामला ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने से जुड़ा हुआ है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए शताब्दी अस्पताल ले जाया गया है।
इस मामले में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवली ने जानकारी देते हुए बताया कि राम यादव की तरफ से दहिसर में रिक्शा चालकों के लिए एक संवाद सभा आयोजित की गई थी, जिसमें संजय निरुपम शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम का मनसे की तरफ से विरोध किया गया था।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने कहा था कि महाराष्ट्र का एजेंडा है कि राज्य में मराठी भाषा को बढ़ावा दिया जाए। हमें मूल एजेंडा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हमारा विरोध उन ऑटो और रिक्शा चालकों के परमिट रद्द करने की धमकी के खिलाफ है जो मराठी बोलना नहीं जानते। कम से कम उन्हें सीखने की अनुमति तो दें, यही हमने सरकार से कहा है।
पुलिस ने आरोपियों पर लगाईं ये धाराएं : हालांकि, पुलिस ने इस मामले में नयन कदम, कुणाल माईणकर और किरण नकाशे समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सभी आरोपियों को कल बोरिवली कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2), 191(3), 191(2), 190, 125, 324(4), 115(2) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 135, 37(1)(अ) के तहत मामला दर्ज किया है।
ऑटो चालकों के लिए मराठी सीखना किया गया अनिवार्य : मुंबई में सभी ऑटो चालकों को मराठी सीखना अनिवार्य किया गया है जिस पर राज ठाकरे की पार्टी भी समर्थन में सड़क पर उतर आई है। वहीं, उत्तर भारतीय नेताओं ने ऑटो वालों की सभाएं कर उन्हें मराठी भाषा की अहमियत समझाने और मराठी भाषा सीखने के लिए समय देने की मांग उठाई है। इसके कारण मनसे आक्रोशित है। मनसे का कहना है जिसे मराठी बोलनी नहीं आती वो ऑटो ना चलाए क्योंकि ये परप्रांतीय ऑटो चालक मराठी ग्राहकों से बदसलूकी करते हैं।







