प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित प्रमुख धार्मिक व्रतों में शामिल है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव-पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि और मनचाही सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
कई बार रिश्ते की बात बनते-बनते अचानक रुक जाती है या विवाह के लिए उचित रिश्ता मिलने में लगातार देरी होती रहती है। ऐसी परिस्थितियों के लिए कुछ पूजा-पाठ और ग्रहों से जुड़े उपाय बताए गए हैं। भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत को भी विवाह संबंधी मनोकामनाओं के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से विवाह के रास्ते में आ रही बाधाएं दूर हो सकती है।
प्रदोष व्रत के ये उपाय दूर करेंगे विवाह की अड़चनें
- सिंदूर का करें तिलक: अगर विवाह में बार-बार रुकावट आ रही है तो प्रदोष व्रत के दिन स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। मां पार्वती को सिंदूर अर्पित करने के बाद उसी सिंदूर को अपने माथे पर लगाकर शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं।
- काले तिल से अभिषेक: अगर शादी में देरी का कारण कुंडली में ग्रहों का अशुभ प्रभाव माना जा रहा हो तो प्रदोष के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके अलावा भगवान शिव का कच्चे दूध से अभिषेक कर मनोकामना की प्रार्थना करें। मान्यता है कि इससे ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और कुंडली में चंद्र ग्रह को मजबूती मिलती है।
- शुक्र के लिए खास उपाय: कुंडली में शुक्र ग्रह की कमजोरी को भी विवाह में देरी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी स्थिति में प्रदोष व्रत के दिन स्नान और दान करने के बाद जल में शहद और सुगंध मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और विवाह से जुड़ी अड़चनें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं।
गुरु प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार, 8 अक्टूबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5:29 बजे से 7:56 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल में भगवन शिव की पूजा की जाती है।
प्रदोष काल का समय स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में पूजा का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं।
शाम को प्रदोष काल से पहले स्नान करके भगवान शिव की पूजा की जाती है। शिवलिंग का अभिषेक और पूजन किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव की स्तुति, मंत्र जाप और आरती की जाती है।
पूजा में श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री का इस्तेमाल कर सकते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान जपे जाने वाले भगवान शिव के 10 आसान मंत्र
- ॐ शिवाय नमः
- ॐ महेश्वराय नमः
- ॐ शंभवे नमः
- ॐ पिनाकिने नमः
- ॐ शशिशेखराय नमः
- ॐ वामदेवाय नमः
- ॐ विरूपाक्षाय नमः
- ॐ कपर्दिने नमः
- ॐ नीललोहिताय नमः
- ॐ शंकराय नमः
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







