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Iran-US Tension : US ने कर ली हमले की तैयारी? ईरान भी संभावित हमले का जवाब देने तैयार!

क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब बस कुछ कदम दूर है? क्या ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी कर ली है? मिडिल ईस्ट में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती क्या किसी बड़े टकराव का संकेत है? और क्यों ईरान के परमाणु ठिकानों पर अचानक गतिविधियां तेज हो गई हैं?

दरअसल, ईरान ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए अपनी सेना की चारों शाखाओं में 1,000 नए “स्ट्रेटेजिक ड्रोन” तैनात कर दिए हैं। यह जानकारी ईरान सरकार से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़ी मानी जाती है।

सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन ड्रोन की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। लेकिन इस ऐलान को अमेरिका को सीधा संदेश माना जा रहा है कि ईरान किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।

इतना ही नहीं ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल अमीर हतामी ने साफ कहा है कि किसी भी हमले का करारा जवाब देना सेना की प्राथमिकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के संभावित लक्ष्यों में कतर में मौजूद अमेरिका का अल उदीद एयर बेस शामिल है। यही वह बेस है, जिस पर जून 2025 में भी ईरान ने जवाबी हमला किया था। इसके बाद से ही अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने कई एयरबेस पर हाई अलर्ट जारी कर रखा है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट की ओर सैन्य ताकत बढ़ा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि एक और बड़ा अमेरिकी सैन्य बेड़ा ईरान की दिशा में बढ़ रहा है।

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यह बेड़ा “ताकत, जोश और मकसद” के साथ आगे बढ़ रहा है। इसे ईरान पर दबाव बनाने और ताकत का खुला प्रदर्शन माना जा रहा है। अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिया है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकते हैं।

इसके साथ गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स का स्क्वाड्रन भी क्षेत्र में भेजा गया है। यह तैनाती साफ संकेत देती है कि अमेरिका किसी भी सैन्य हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी बीच परमाणु ठिकानों पर अचानक हलचल बढ़ गई है। अब सबसे संवेदनशील पहलू ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। पिछले 24 घंटों में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान के इस्फहान शहर स्थित परमाणु फैसिलिटी पर नई गतिविधियां देखी गई हैं। यह वही संयंत्र है, जिस पर पिछले साल अमेरिका ने हमला किया था और इसे भारी नुकसान पहुंचा था।

इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के मुताबिक, ईरान ने एक बार फिर अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स के सेंट्रल एंट्री गेट को मिट्टी से भर दिया है। इसके साथ ही दक्षिणी एंट्री गेट पर भी ताजा मिट्टी डाली जा रही है, ताकि वहां का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाए। इसे संभावित अमेरिकी हमले से बचाव की रणनीति माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन अंडरग्राउंड स्टोरेज साइट्स में करीब 408 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। ईरान इन स्टोरेज फैसिलिटीज को लगभग किले जैसी सुरक्षा में बदल रहा है, ताकि किसी भी बमबारी या एयरस्ट्राइक से इन्हें बचाया जा सके। सैटेलाइट तस्वीरों में जमीन के ऊपर मौजूद उस इमारत में भी गतिविधियां देखी गई हैं, जहां पहले सेंट्रीफ्यूज बनाए जाते थे। सेंट्रीफ्यूज वह मशीनें होती हैं, जिनसे यूरेनियम को संवर्धित किया जाता है। ज्यादा संवर्धन परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जाता है।

जून 2025 में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के नतांज, फोर्दो और इस्फहान परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। दोनों देशों का आरोप है कि ईरान नागरिक परमाणु कार्यक्रम की आड़ में परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उद्देश्यों के लिए है। वहीं ट्रंप बिना शर्त समझौते की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान का साफ कहना है कि हमले की धमकियों के साए में बातचीत संभव नहीं है।

ड्रोन की तैनाती, अमेरिकी युद्धपोत और परमाणु ठिकानों पर बढ़ती गतिविधि ये सभी संकेत मिडिल ईस्ट में एक बड़े टकराव की आशंका को और गहरा कर रहे हैं।

अब सवाल यही है क्या यह सब युद्ध की तैयारी है? या फिर दबाव बनाकर ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की रणनीति?

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