Home » उज्जैन में शाही मस्जिद के बाहर झड़प, सड़क चौड़ीकरण पर क्या है विवाद?
मध्यप्रदेश

उज्जैन में शाही मस्जिद के बाहर झड़प, सड़क चौड़ीकरण पर क्या है विवाद?

उज्जैन। उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण के लिए शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने की कार्रवाई के दौरान सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग खुद ही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने पहुंचे, लेकिन इस दौरान नारेबाजी और विरोध शुरू हो गया। कुछ लोग हंगामा करने लगे।

सोमवार सुबह प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने के लिए पहुंचे। इस दौरान नारेबाजी होने लगी और कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने उपद्रव की कोशिश कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

शहर काजी बोले- मस्जिद का मसला हल हो चुका, अफवाहों पर ध्यान न दें :  शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने के बीच उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने समाज के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मस्जिद का मामला रात में ही सुलझ चुका है। जिस बात पर सहमति बनी है, उसके मुताबिक काम किया जा रहा है।

शहर काजी ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना वजह बाजार में जमा न हों। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, जिसके लिए लोगों को वहां जाने की जरूरत पड़े। अफवाहों के कारण घरों से बाहर न निकलें।

कलेक्टर ने भी की अपील :  उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने भी आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। उनके लिए जरूरी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं और मास्टर प्लान के अनुरूप सड़कों का चौड़ीकरण किया जा रहा है।

कलेक्टर के मुताबिक, सभी धर्मों और समुदायों के लोग इन कार्यों में स्वेच्छा से योगदान दे रहे हैं। शाही मस्जिद के पास का यह मार्ग महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को जोड़ता है। सिंहस्थ और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान बनाने के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है।

हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला, युगलपीठ में सुनवाई :  शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के विरोध में मस्जिद कमेटी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया है। मस्जिद पक्ष का दावा है कि यह 100 साल से अधिक पुरानी ऐतिहासिक इमारत है और इसके समर्थन में दस्तावेज भी मौजूद हैं।

एकलपीठ में याचिका खारिज होने के बाद मस्जिद कमेटी ने युगलपीठ के समक्ष मामला प्रस्तुत किया। मस्जिद पक्ष का कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात के लिए मस्जिद की ओर से जमीन दी गई थी और उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क बनी हुई है।

मस्जिद पक्ष की याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट की इंदौर स्थित युगलपीठ में सुनवाई प्रस्तावित है। एकलपीठ करीब 15 दिन पहले याचिका निरस्त कर चुकी है। अब युगलपीठ के फैसले पर नजरें टिकी हैं।

मस्जिद पक्ष का यह दावा :  मस्जिद पक्ष का दावा है कि शाही मस्जिद 636 साल पुरानी है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम के अनुसार, मस्जिद का एक हिस्सा तोड़े जाने से पूरी इमारत की संरचना प्रभावित हो सकती है। प्रशासन की कार्रवाई के तहत मस्जिद के एक ओर से करीब चार फीट और दूसरी ओर से नौ फीट हिस्सा हटाया जा रहा है।

मस्जिद के सामने बैरिकेडिंग, सुरक्षा बल तैनात :  कार्रवाई की आशंका के चलते शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिद के भीतर और बाहर जमा होने लगे थे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी जारी रही। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मस्जिद के सामने बैरिकेडिंग की और पुलिस बल के साथ आरएएफ की तैनाती की थी।

हालात बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। दोपहर करीब 12 बजे फिर पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मामले में 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

मार्ग चौड़ीकरण के लिए कार्रवाई :  मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की कार्रवाई उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत की जा रही है। कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ा मार्ग प्रस्तावित है। शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा सड़क की निर्धारित सीमा में आ रहा है। इसी हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ीकरण का रास्ता साफ किया जा रहा है।

ओवैसी ने भी जताया विरोध :  उधर, शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने के मामले को लेकर उज्जैन के बाहर भी सियासत गरमा गई है। एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इंटरनेट मीडिया पर इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मस्जिद पर कार्रवाई का विरोध किया और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वक्फ कानून में संशोधन का उद्देश्य कलेक्टरों और राज्य सरकारों के जरिए मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और कब्रिस्तानों को मुस्लिम समुदाय से छीनना है।

Search