नई दिल्ली। पिछले कई महीने से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी विनोद कांबली स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाल की एक रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके दिमाग में खून के थक्के बन गए हैं, जिससे ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ गया है। कांबली के पुराने दोस्त मार्कस कुटो के अनुसार पिछले कई महीनों से उन्हें याददाश्त से संबंधित दिक्कतें भी हो रही हैं। उनकी याददाश्त अच्छी नहीं है, लेकिन पिछले छह महीनों में इसमें कोई गिरावट भी नहीं आई है।
उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं रहता, लेकिन जब कोई बात क्लिक कर जाती है, तो उन्हें याद आ जाता है। वरना उनके लिए यह मुश्किल हो जाता है। फिलहाल कांबली की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा ब्रेन में नोटिस किए गए ब्लड क्लॉट्स हैं, जो संभवतः दिमाग में खून के संचार को बाधित कर बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
कारण और मौजूदा स्थिति : ब्रेन स्ट्रोक के मुख्य कारणों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, वायु प्रदूषण, धूमपान, तनाव और अस्वास्थ्यकर आहार शामिल हैं। इससे दुनिया में प्रति वर्ष लगभग 1.5 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं, जिनमें से 50-60 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।
भारत में हर साल लगभग 15 से 18 लाख नए मामले सामने आते हैं, जो हर 20 सेकंड में एक स्ट्रोक के बराबर है। अब यह युवाओं (45 वर्ष से कम) को भी प्रभावित कर रहा है। भारत में 1990 से 2021 के बीच स्ट्रोक के मामलों में 51% की वृद्धि हुई है। स्ट्रोक के योग्य रोगियों में से केवल 1% को ही सही समय पर (4.5 घंटे के भीतर) इलाज मिल पाता है।
धूमपान से बढ़ जाता है ब्रेन स्ट्रोक का खतरा : मार्कस कुटो के अनुसार डाक्टर कह रहे हैं कि विनोद को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बना हुआ। उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है, लेकिन कभी-कभी वह लोगों से सिगरेट मांगते हैं। वे आटो ड्राइवरों से सिगरेट मांगते हैं और लोग खुशी-खुशी सिगरेट दे देते हैं, यह सोचकर कि वे कांबली की मदद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अहसास नहीं होता कि वे कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं।
क्यों होती है दिमाग में क्लॉटिंग की दिक्कत? : रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ प्रकार की मेडिकल स्थितियां, जीवनशैली व आनुवंशिक कारकों के चलते खून के थक्कों की समस्या बढ़ जाती है। ये थक्के दिमाग के अलावा शरीर में कई अन्य हिस्सों में हो सकते हैं। एट्रियल फाइब्रिलेशन, हाई बीपी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, एथेरोस्क्लेरोसिस, मोटापा जैसे स्थितियां थक्कों का कारण बन सकती हैं।
दिमाग में खून का थक्का बनने से खून व आक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है। यही क्लॉट इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बनते हैं। स्ट्रोक दुनियाभर में वयस्कों में विकलांगता व मौत का कारण हैं। भारत में भी बड़ी संख्या में बुजुर्ग इससे पीड़ित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी संस्थाएं जागरूकता अभियान चलाती हैं, लेकिन और काम करने की जरूरत है।
स्ट्रोक के क्या लक्षण होते हैं
- शरीर के एक हिस्से में कमजोरी
- चेहरे का एक तरफ झुकना
- बोलने में दिक्कत
- अचानक तेज सिर दर्द
कैसे करें स्ट्रोक से बचाव कैसे करें ?
- हर 8 महीने में ब्लड प्रेशर की जांच कराएं
- रोज कम से कम 30 मिनट वॉक करें
- किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन न करें
- नमक कम खाएं
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।







