नाना पाटेकर ने ‘गमन’ फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की और ‘ओ रोमियो’ तक में काम किया। अभिनेता की सिर्फ फिल्में ही नहीं, बल्कि उनके डायलॉग्स भी काफी चर्चा में रहे। अपनी अदाकारी से सबका दिल जीतने वाले दिग्गज एक्टर भले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके डाॅयलाॅग व अदाकारी ने लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ दी है। आइए आपको बताते हैं एक्टर के कुछ बेहतरीन डायलॉग्स।
‘साला ये दुख काहे खत्म नहीं होता बे’… नाना पाटेकर सिर्फ अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए नहीं जाने जाते थे। बल्कि, उनके बोलने का अंदाज भी लोगों को काफी पसंद आता था। यही वजह थी कि जब वह अपनी फिल्मों में किसी डायलॉग को बोलते थे, तो वह छा जाता था। अभिनेता ने कभी गुस्से में बोलकर तालियां बटोरीं, तो कभी एक साधारण-सी बात को अपने अंदाज से ऐसा बना दिया कि वह वर्षों तक याद रही।
‘क्रांतिवीर’ से लेकर ‘वेलकम’ तक उनके संवादों ने उनके किरदारों को अलग पहचान दी। खास बात यह रही कि नाना की संवाद अदायगी में अभिनय और वास्तविकता के बीच की दूरी लगभग खत्म हो जाती थी। आइए नजर डालते हैं उनके 10 ऐसे संवादों पर, जिनका असर फिल्मों के बाहर भी दिखाई दिया।
1. ‘आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने?’- क्रांतिवीर
2. ‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून… बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा?’- क्रांतिवीर

3. ‘सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान’- यशवंत
4. ‘एक मच्छर साला आदमी को हिजड़ा बना देता है’- यशवंत
5. ‘धंधे में कोई किसी का भाई नहीं होता’- परिंदा
‘परिंदा’ में नाना ने अन्ना के किरदार में अपराध की दुनिया का निर्मम चेहरा दिखाया था। यह डायलॉग उस दुनिया के उसूल को बेहद सीधे शब्दों में सामने रखता है, जहां रिश्तों से ज्यादा मायने स्वार्थ और धंधे का होता है। इस भूमिका ने नाना को हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली नेगेटिव किरदारों में जगह दिलाई।

6. ‘पंद्रह सौ की नौकरी करने वाला, एक दिन तुझे डेढ़ सौ का कफन पहनाएगा’- तिरंगा
‘तिरंगा’ में नाना का पुलिस अधिकारी वाला अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया। यह संवाद सत्ता और अपराध के सामने एक आम सरकारी कर्मचारी की चुनौती को दर्शाता है। नाना की डिलीवरी ने इसे देशभक्ति और कर्तव्य की भावना से जोड़ दिया।
7. ‘अपना तो उसूल है, पहले लात, फिर बात, उसके बाद मुलाकात’- तिरंगा
यह लाइन नाना के किरदार की दबंग छवि का हिस्सा बनी। संवाद में मौजूद लय और नाना के बोलने के अंदाज ने इसे खास बना दिया। ‘तिरंगा’ के एक्शन और देशभक्ति वाले माहौल में यह डायलॉग उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को और मजबूत करता है।
8. ‘हम सब सिस्टम का हिस्सा हैं… सिस्टम डिसाइड करता है, अपन फॉलो करता है।’- अब तक छप्पन
‘अब तक छप्पन’ में नाना ने पुलिस अधिकारी साधु आगाशे का किरदार निभाया था। यह डायलॉग उस पूरी व्यवस्था की विडंबना को सामने लाता है, जिसमें अधिकारी खुद भी सिस्टम के फैसलों से बंधा हुआ है। इस भूमिका ने नाना को एक बार फिर गंभीर और यथार्थवादी अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
9. ‘भगवान का दिया हुआ सब कुछ है… दौलत है, शोहरत है, इज्जत है…’- वेलकम
यहीं नाना पाटेकर ने साबित किया कि उनकी आवाज सिर्फ गुस्से और गंभीर भूमिकाओं के लिए नहीं है। ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी ने उनकी इंटेंस एक्टिंग को कॉमेडी में बदल दिया। डायलॉग की गंभीर प्रस्तुति और स्थिति की कॉमेडी के बीच का विरोधाभास ही इस किरदार की सबसे बड़ी ताकत बना। उदय शेट्टी के डायलॉग आज भी सोशल मीडिया और मीम कल्चर में खूब इस्तेमाल होते हैं।
10. ‘कुणी घर देता का घर? एका तुफानाला कुणी घर देता का?’- नटसम्राट
‘नटसम्राट’ में नाना ने आप्पासाहेब बेलवलकर के रूप में जिंदगी के उस दर्द को पर्दे पर उतारा, जहां एक कलाकार अपने ही घर में अकेला पड़ जाता है। यह डायलॉग मराठी रंगमंच और सिनेमा के बेहद चर्चित संवादों में शामिल है। इसमें सिर्फ घर खोने का दुख नहीं, बल्कि उम्र, रिश्तों और कलाकार के अस्तित्व का संकट दिखाई देता है।







