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छत्तीसगढ़

रायपुर में जमीन के नाम पर 35 लाख की ठगी! रजिस्ट्री से पहले पति हुआ लापता

पत्नी के नाम कर दी पूरी जमीन, दोनों पर एफआईआर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मंदिर हसौद इलाके में जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जमीन बेचने का सौदा कर खरीदार से 35 लाख रुपये से अधिक की रकम लेने के बाद रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इसके बजाय जमीन मालिक कथित तौर पर लापता हो गया और उसकी पत्नी ने थाने में गुमशुदगी की सूचना दर्ज करा दी। बाद में खरीदार को पता चला कि जिस जमीन के लिए उसने लाखों रुपये चुकाए थे, उसे दान विलेख के जरिए पत्नी के नाम हस्तांतरित कर दिया गया है।

शिकायत की जांच के बाद मंदिर हसौद पुलिस ने पति करण मन्नाडे और पत्नी रूखमणी मन्नाडे के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है।

कोटवार के माध्यम से तय हुआ था जमीन का सौदा

न्यू राजेंद्र नगर निवासी रजनीकांत सिंह के अनुसार, ग्राम मुनरेठी के कोटवार रोहित रविदास के माध्यम से उनकी पहचान जमीन मालिक करण मन्नाडे से हुई थी। करण अपनी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा बेचना चाहता था। जमीन देखने के बाद 790 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से सौदा तय हुआ। 14 अक्टूबर 2024 को लगभग 6,780 वर्गफुट जमीन के लिए विक्रय अनुबंध किया गया। रजिस्ट्री कराने के लिए तीन से चार महीने का समय निर्धारित किया गया था।

अलग-अलग बहानों से लेते रहे पैसे

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के बजाय करण दस्तावेज तैयार कराने, जमीन की नाप और अन्य जरूरतों का हवाला देकर लगातार रकम मांगता रहा। खरीदार के मुताबिक, उसने 11 जून 2025 तक कुल 35 लाख 1,240 रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बावजूद रजिस्ट्री नहीं हुई। करण ने फोन उठाना बंद कर दिया तो खरीदार ने अधिवक्ता के माध्यम से 6 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस भेजा। इसके अगले दिन समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना भी प्रकाशित कराई, ताकि जमीन का कोई अन्य सौदा न हो सके।

पत्नी ने पति के लापता होने की दी थी सूचना

इस दौरान खरीदार ने जमीन के संबंध में जानकारी लेने के लिए करण की पत्नी रूखमणी से संपर्क किया। पत्नी ने बताया कि उसका पति बिना जानकारी दिए घर से चला गया है। उसने 14 जुलाई 2025 को मंदिर हसौद थाने में पति की गुमशुदगी की सूचना भी दर्ज कराई थी। साथ ही कोटवार के माध्यम से आश्वासन दिया गया कि पति के लौटने के बाद जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी। खरीदार को उस समय जमीन के स्वामित्व में हुए बदलाव की जानकारी नहीं थी।

गुमशुदगी की सूचना के बीच दान विलेख से पत्नी के नाम हुई जमीन

शिकायतकर्ता के अनुसार, बाद में राजस्व अभिलेखों की जानकारी जुटाने पर पता चला कि 6 अगस्त 2025 को करण मन्नाडे ने अपनी पत्नी रूखमणी के नाम दान विलेख निष्पादित कर दिया था। इसमें विक्रय अनुबंध वाली जमीन के साथ उसकी अन्य जमीन भी शामिल थी। पुलिस ने करण को 5 दिसंबर 2025 को दस्तयाब किया था। खरीदार ने आरोप लगाया है कि रजिस्ट्री की जिम्मेदारी से बचने और उसकी रकम हड़पने के उद्देश्य से पति-पत्नी ने मिलकर यह पूरा घटनाक्रम रचा।

पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी और षड्यंत्र का केस

शिकायत की जांच के बाद मंदिर हसौद पुलिस ने 6 नवंबर 2026 को करण मन्नाडे और रूखमणी मन्नाडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब विक्रय अनुबंध, भुगतान से जुड़े साक्ष्य, राजस्व अभिलेख और दान विलेख की जांच की जाएगी।