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धनतेरस की शाम जरूर गाएं ये चार आरती, अच्छे स्वास्थ्य के साथ घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

आज 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन खरीदारी के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसी कारण से इस दिन हर कोई कुछ न कुछ नया सामान जरूर खरीदता है। इसके अलावा इस दिन शाम के समय माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की विधि विधान पूजा की जाती है।

कहते हैं इनके पूजन से अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। लेकिन इस पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब इस दिन ये 4 आरतियां जरूर की जाएं। चलिए जानते हैं धनतेरस आरती के लिरिक्स।

धनतेरस पर आरती करने का शुभ समय 

धनतेरस पर पूजा और आरती का शुभ समय शाम 06:02 से 07:57 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पर कौन-कौन सी आरती करनी चाहिए?

  1. भगवान गणेश की आरती
  2. माता लक्ष्मी की आरती
  3. कुबेर देवता की आरती
  4. धन्वंतरि भगवान की आरती

धनतेरस पर सबसे पहले करें गणेश जी की आरती 

  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
  • माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
  • लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
  • अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
  • बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
  • ‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
  • दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
  • कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
  • जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
  • माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दूसरे नंबर पर करें लक्ष्मी जी की आरती 

  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
  • उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
  • सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
  • जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
  • कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
  • सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
  • खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
  • रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
  • उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
  • तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
  • ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

तीसरे नंबर पर करें कुबेर देवता की आरती 

  • ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
  • शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे ।
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
  • दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।
  • योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।
  • दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • भांति भांति के व्यंजन बहुत बने, स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
  • मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।
  • अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले ।
  • अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
  • यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।
  • कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥
  • ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

चौथ नंबर पर करें धन्वंतरि जी की आरती

  • ओम जय धनवंतरि देवा, जय धनवंतरि देवा।
  • जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
  • जय धनवंतरि देवा।।
  • तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
  • देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
  • जय धनवंतरि देवा।।
  • आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
  • सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
  • जय धनवंतरि देवा।।
  • भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
  • आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
  • जय धनवंतरि देवा।।
  • तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
  • असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
  • जय धनवंतरि देवा ।।
  • हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
  • वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का चेरा।।
  • जय धनवंतरि देवा।।
  • धनवंतरिजी की आरती जो कोई जन गावे।
  • रोग-शोक न आवे, सुख-समृद्धि पावे।।
  • जय धनवंतरि देवा।।

 

डिस्क्लेमर :  उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए  Today Studio उत्तरदायी नहीं है।