दुर्ग। 23 तारीख को दुर्ग जिला अस्पताल में दो महिलाओं शबाना कुरैशी और साधना सिंह ने सिजेरियन डिलीवरी के जरिए बेटे को जन्म दिया। शबाना कुरैशी का बेटा सुबह 1.25 बजे पैदा हुआ, जबकि साधना सिंह का बेटा 1.34 बजे जन्मा। अस्पताल की प्रोटोकॉल के अनुसार, नवजात की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसकी कलाई पर एक टैग लगाया जाता है, लेकिन इसी प्रक्रिया में अस्पताल प्रशासन ने गंभीर लापरवाही बरती। दुर्ग जिला अस्पताल में दो नवजात शिशुओं की अदला-बदली से दो परिवारों में हड़कंप मच गया। अब डीएनए टेस्ट से असली माता-पिता की पहचान होगी। अस्पताल की लापरवाही पर सवाल उठे हैं।
मामले का खुलासा तब हुआ जब अस्पताल से घर लौटने के बाद नवजात की कलाई पर लगे नेम टैग किसी और मां का नाम लिखा पाया गया। संदेह होने पर परिवार ने तत्काल जिला अस्पताल प्रशासन को सूचित किया, जिससे पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। इसकी जानकारी मिलते ही कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें सहायक कलेक्टर, अस्पताल की नोडल डॉक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी को शामिल किया गया। जांच में ऑपरेशन थियेटर में कार्यरत तकनीशियन की लापरवाही उजागर हुई। जिससे दोनों नवजात की अदला बदली की आशंका हुई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया, जिससे सच्चाई सामने आ सके और बच्चों को उनके वास्तविक माता-पिता को सौंपा जा सके। कलेक्टर ने बताया कि डीएनए टेस्ट विश्वसनीय माध्यम है। डीएनए रिपोर्ट के आधार पर सही माता पिता की पहचान हो जाएगी। उसके बाद दोषी अस्पताल कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की निगाहें डीएनए टेस्ट पर टिकी हुई है। जिससे स्पष्ट होगा कि नवजातों की अदला बदली हुई या नहीं।







