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राजस्थान

दुर्लभ नीली तितली : राजस्थान के नाम दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड

राजस्थान के सलूंबर क्षेत्र में दुर्लभ तितली पॉइंटेड सिलिएट ब्लू का राज्य से पहला आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। तितली शोधकर्ता मुकेश पंवार की इस खोज को वैज्ञानिक पत्रिका ‘बायोनॉट्स’ ने मान्यता दी है, जिससे राजस्थान की तितली जैवविविधता और समृद्ध हुई है।

जैव विविधता से समृद्ध राजस्थान के दक्षिणी अंचल में तितलियों के अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सलूंबर में पॉइंटेड सिलिएट ब्लू (Anthene lycaenina) नामक दुर्लभ तितली का राजस्थान से पहला आधिकारिक रिकॉर्ड तितली शोधकर्ता मुकेश पवार ने दर्ज किया है। इस खोज ने राज्य की तितली जैव विविधता को समृद्ध किया है। साथ ही शुष्क व कांटेदार वन पारिस्थितिकी के अध्ययन को भी नई दिशा दी है। इस खोज के साथ ही राजस्थान में पहली बार इस प्रजाति के लिए Caesalpinia bonduc (गुइलंडिना बोनडुक) को लार्वल होस्ट पौधे के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह वनस्पति स्थानीय रूप से कटकरंज, गजला, मेंढ़ल, पांशुल आदि नामों से जानी जाती है।

जयसमंद में हुई खोज
यह खोज 2 नवंबर 2025 को जयसमंद अभयारण्य गेट के सामने दर्ज की गई। तितली को कैटरपिलर Caesalpinia bonduc के फूलों की कलियों पर पाया गया, जिसे सागवाड़ा डूंगरपुर निवासी तितली शोधकर्ता मुकेश पंवार द्वारा एकत्र किया गया। बाद में सुरक्षित रूप से घर पर इसका पूरा जीवन चक्र पूर्ण किया गया।

तितली का जीवन चक्र
प्यूपा (कोष) बनने की तिथि: 9 नवंबर 2025
इक्लोजन (वयस्क तितली का बाहर निकलना): 17 नवंबर 2025
कुल अवधि: 15 दिन
वयस्क तितली का पंख फैलाव: 24–29 मिमी

शोधपत्रिका ने दी वैज्ञानिक मान्यता
राजस्थान से इस तितली की पहली उपस्थिति को तितली शोधकर्ता मुकेश पंवार ने दर्ज किया। यह शोध कार्य पीटर स्मैटचेक निदेशक, बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर, भीमताल – उत्तराखंड के सानिध्य में पूर्ण हुआ और वैज्ञानिक पत्रिका ‘बायोनॉट्स’ के दिसंबर 2025 अंक में शोधपत्र के रूप में प्रकाशित हुआ है।

आवास क्षेत्र का विस्तार :  सामान्यतः यह तितली दक्षिणी भारत के पूर्वी घाट में पाई जाती है, लेकिन दक्षिणी गुजरात और मध्य प्रदेश में भी इसकी उपस्थिति दर्ज की गई है। कटकरंज के फैलाव और अनुकूल परिस्थितियों के कारण इसका आवास क्षेत्र बढ़ा हुआ माना जा रहा है। तितलियों और पतंगों की उपस्थिति उनके लार्वा के भोज्य पौधों पर निर्भर होती है। स्थानीय वनस्पतियों का संरक्षण स्वस्थ पर्यावरण और सुदृढ़ भोजन श्रृंखला के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में भविष्य में और भी दुर्लभ तितली प्रजातियों की खोज की संभावनाएं बढ़ेंगी।

पेशे से शिक्षक हैं मुकेश पंवार :  उल्लेखनीय है कि मुकेश पंवार, निवासी सागवाड़ा (जिला डूंगरपुर), पेशे से शिक्षक हैं और तितलियों के अध्ययन में सक्रिय शोधकर्ता हैं। उन्होंने वर्ष 2020 में पीटर स्मैटचेक के सहयोग से भारत में नई तितली स्पियलिया जेब्रा की खोज, उसका जीवन चक्र एवं विस्तार क्षेत्र दर्ज किया। 2023 में अलवर से गोल्डन बर्ड विंग तितली की महत्वपूर्ण खोज भी की गई थी। पंवार की यह उपलब्धि न केवल राजस्थान, बल्कि देशभर में तितली जैवविविधता के अध्ययन में मील का पत्थर मानी जा रही है।

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