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22 सितंबर को शुभ संयोग में नवरात्रि का हो रहा आरंभ : जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त व पूजा विधि

कल से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने जा रहा है। नवरात्रि में घट स्थापना यानी कलश स्थापना का बड़ा महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों का दिव्य अनुष्ठान माना जाता है। ऐसे में अनुष्ठान के लिए कलश की स्थापना की जाती है। इसे शांति कलश कहा जाता है।

शांति कलश की स्थापना के बाद ही दुर्गा पूजा अनुष्ठान का आरंभ माना जाता है। इसलिए दुर्गा पूजा में शांति कलश की स्थापना का मुहूर्त बहुत महत्व रखता है। इसलिए दुर्गा पूजा में शुभ मुहूर्त देखकर ही कलश स्थापना करने का विधान है।

शांति कलश की स्थापना करते समय कलश में सातों समुद्र, सभी नदियों, देवी देवताओं, दिक्कपालों का आह्वान किया जाता है। फिर इनकी पूजा की जाती है। इसके बाद संपूर्ण कलश में शुभ तत्वों को संभाले हुए भगवान गणेश जी विराजमान होकर कार्य को निर्विघ्न होने का आशीर्वाद देते हैं, इसलिए संपूर्ण रूप से कलश को विघ्नहर्ता गणेश का स्वरूप माना जाता है।

अबकी बार 22 सितंबर दिन सोमवार को नवरात्रि का आरंभ शुभ संयोग में हो रहा है। इस दिन सूर्योदय से ही आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि व्याप्त रहेगी। और साथ ही दिन में 11 बजकर 24 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग बनेगा। और इसके बाद हस्त नक्षत्र लग जाएगा। लेकिन सुबह 7 बजकर 30 मिनट से लेकर 9 बजे तक राहुकाल भी व्याप्त रहेगा। ऐसे में राहुकाल का त्याग करके दुर्गा पूजा अनुष्ठान के लिए कलश स्थापना करें। शास्त्रों के अनुसार गृहस्थजन घर पर सुबह के समय 7 बजकर 30 बजे से पहले और 9 बजे के बाद घट स्थापना करें तो यह उत्तम होगा। जबकि पूजा पंडाल में अभिजीत मुहूर्त में दुर्गा पूजा के लिए घट स्थापना करना शुभ रहेगा।

0 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

  • दिल्ली – सुबह 06:13 से 07:29 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:38 तक
  •  मुंबई – सुबह 06:31 से 07:20 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 12:07 से 12:55 तक
  •  कोलकाता – सुबह 05:28 से 07:16 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:05 से 11:53 तक
  •  चेन्नई – सुबह 06:01 से 07:22 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:37 से 12:26 तक
  •  जम्मू – सुबह 06:23 से 08:19 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:59 से 12:47 तक
  •  शिमला – सुबह 06:13 से 07:08 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:38 तक
  • चण्डीगढ़ – सुबह 06:15 से 07:09 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:51 से 12:40 तक
  • जयपुर – सुबह 06:19 से 07:10 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:55 से 12:44 तक
  • लखनऊ – सुबह 05:59 से 07:15 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 12:07 से 12:56 तक
  • वाराणसी – सुबह 05:50 से 07:20 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:34 से 12:23 तक
  • भोपाल – सुबह 06:10 से 07:01 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:26 से 12:15 तक
  • बंगलुरू- सुबह 06:13 से 07:28 तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:48 से 12:36 तक
  • देहरादून – सुबह 06:16 से 07:04 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:37 तक
  • रायपुर – सुबह में 05:56 से 07:25 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:46 से 12:35 तक
  • पटना – सुबह में 05:42 से 07:32 मिनट तक इसके बाद अभिजीत मुहूर्त 11:18 मिनट से 12:06 तक

 

नवरात्रि कलश स्थापना की पूजा विधि

  • नवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  •  इसके बाद पूजा स्थल पर लाल रंग के आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके बैठे। इसके बाद हाथ में कुश लें और हाथ में जल लेकर पूजा स्थल और पूजन सामग्री पर छिड़क दें और ओम अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः। मंत्र का जप करें।
  • अपना माथे पर चंदन से तिलक करते हुएचंदनस्य महतपुण्यं पवित्रं पाप नाशनम। आपदं हरति नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा। मंत्र का जप करें।
  • कलश की स्थापना के लिए सप्तमृतिका बालू में मिलाकर अच्छे से फैलाकर गोलाकर बना लें। इसके बाद बीच में कलश को स्थापित करें।
  • कलश को स्थापित करने से पहले उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बना लें। कलश को भी उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखें।
  • ओम भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्रीं। पृथिवीं यच्छ पृथिवीं दृग्वंग ह पृथिवीं मा हि ग्वंग सीः।। मंत्र का जप करते हुए कलश स्थापित करने के लिए मिट्टी को फैलाएं।
  • इसके बाद मिट्टी में जौं को कलश के नीचे रखी मिट्टी में मिला दें और ओम धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्यो दानाय त्वा व्यानाय त्वा। दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि।। मंत्र का जप करें।
  • ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।। मंत्र का जप करते हुए कलश पर फूल रख दें।
  • ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।। मंत्र को बोलते हुए जल को कलश में भर दें।
  •  ओम त्वां गन्धर्वा अखनस्त्वामिन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः। त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान् यक्ष्मादमुच्यत।। मंत्र का जप करे और कलश पर चंदन से तिलक लगा दें।
  • कलश के जल को प्रभावशाली बनाने के लिए उसमें सर्वोषधि डालें और सर्वोषधि डालते हुए ओम या ओषधी: पूर्वाजातादेवेभ्यस्त्रियुगंपुरा। मनै नु बभ्रूणामह ग्वंग शतं धामानि सप्त च।। मंत्र बोलें।
  • कलश पर पंच पल्लव रखते हैं और पल्लव रखते हुए ओम अश्वस्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता।। गोभाज इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्।। मंत्र का जप करें।
  • कलश में सात प्रकार की मिट्टी डालें और बोले ओम स्योना पृथिवि नो भवानृक्षरा निवेशनी। यच्छा नः शर्म सप्रथाः।
  • कलश में सुपारी डालें और बोलें ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पायाश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व ग्वंग हसः।।
  •  इसके बाद कलश में सिक्का डालें और कहें ओम हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम।।
  •  कलश में वस्त्र अर्पित करें वस्त्र अर्पित करने का मंत्र है वासो अग्ने विश्वरूप ग्वंग सं व्ययस्व विभावसो।। कलश पर पीले और लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें।
  • कलश में अक्षत डालें और अक्षत डालते समय वस्नेव विक्रीणावहा इषमूर्ज ग्वंग शतक्रतो।। मंत्र का जप करें।
  • कलश पर नारियल रखने के लिए पहले नारियल पर एक वस्त्र लपेट लें और बोलें ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व हसः।। बोलते हुए नारियल को कलश पर स्थापित कर दें।
  • अंत में घी का दीपक जलाकर परिवार के साथ मिलकर मां दुर्गा का पूजन शुरु कर दें।

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