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राजस्थान

कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल में हत्या, 100 से ज्यादा मामले थे दर्ज, मचा हड़कंप

अजमेर। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद डकैत जगन गुर्जर की हत्या की खबर है। प्रारंभिक जांच में टॉवल या गमछा से गला दबाकर हत्या किए जाने की आशंका जताई गई है। घटना दोपहर करीब 11:03 बजे बैरिक के भीतर हुई। पुलिस ने बैरिक में बंद साथी कैदी विष्णु गुर्जर पर हत्या का आरोप लगाया है। सूचना मिलते ही एफएसएल टीम और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और साक्ष्य जुटाने शुरू किए।  एसपी एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल की निगरानी में पूछताछ और जांच जारी है।

क्या है पूरा मामला? :  कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जेल परिसर में उसका शव मिला है।  जगन गुर्जर का नाम राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के डांग और चंबल क्षेत्र में दशकों तक दहशत का पर्याय रहा। उस पर हत्या के प्रयास, लूट, फिरौती, अपहरण, नकबजनी और डकैती जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े 100 से ज्यादा मामले दर्ज बताए जाते हैं।

हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप :  हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर हुई इस हत्या के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही एसपी सहित पुलिस के आला अधिकारी और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। फिलहाल एसपी खुद इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच कर रहे हैं और आरोपी विष्णु गुर्जर से कड़ी पूछताछ की जा रही है।

टोंक जेल से आए एक वीडियो ने भी व्यवस्था पर उठाए थे सवाल :  इससे पहले सिंतबर 2025 में टोंक जिले से एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो ने जेल व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। दरअसल इस वीडियो में मर्डर और पुलिस पर फायरिंग करने वाले 2 कैदी हाथ में हथियार लिए नजर आए थे और सिगरेट, गुटखा भी दिखाया था। कैदी वीडियो के अंदर फोन पर बातें भी कर रहे थे।

वीडियो में दिखने वाला कैदी किसी से फोन में कह रहा था कि आशीर्वाद है आपका, कोई दिक्कत नहीं है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महकमे पर सवाल उठे थे और हड़कंप मच गया था। आनन-फानन में मामले की जांच के आदेश दिए गए थे।

बता दें कि देशभर से तमाम मौकों पर जेल के अंदर के फोटो और वीडियो सामने आते रहे हैं, जिसमें कैदी उन सुविधाओं का लाभ लेते हुए दिख चुके हैं, जो लोग अपने घरों में लेते हैं। ऐसे मामले पुलिस और प्रशासन के लिए सवाल बनते रहे हैं और समय-समय पर कार्रवाई भी हुई है। हालांकि अभी भी पूरी तरह ये नहीं कहा जा सकता है कि जेलों में कैदियों को एक्सट्रा बेनिफिट नहीं मिल रहे हैं। जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जेलों के अंदर हिंसा भी इसी तरह के मामले हैं, जो समय-समय पर सामने आते रहते हैं।

 

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