वैज्ञानिक बोले- 16 करोड़ साल पहले यहां था टेथिस सागर
गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिले की नीती घाटी में चीन सीमा से लगे लपथल क्षेत्र में छिपा शालिग्राम जीवाश्म (फासिल्स) का खजाना अब देश-दुनिया की नजरों में आग गया है। यहां शालिग्राम पत्थर की मौजूदगी के कारण इसे जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने की मांग हो रही है। शालिग्राम सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि इसे करोड़ों वर्ष पुराना जीवाश्म है। विज्ञानी पहले ही इसे समुद्र के पहाड़ में परिर्वतन का गवाह बता चुके हैं।
समुद्रतल से 4,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लपथल क्षेत्र सड़क मार्ग से जुड़ चुका है। आवाजाही आसान होने से प्रशासन अब स्थानीय निवासियों समेत पर्यटकों को यहां जाने की अनुमति भी दे रहा है। मई में यहां नीती अल्ट्रा मैराथन का भी आयोजन हो चुका है।
बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआइपी) के वरिष्ठ विज्ञानी डा. हुकम सिंह व डा. रणवीर सिंह के अनुसार करोड़ों वर्ष पहले यह क्षेत्र टेथिस सागर का हिस्सा रह चुका है, लिहाजा यह भूविज्ञान की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
दोनों विज्ञानी जून 2025 में लपथल क्षेत्र का व्यापक सर्वेक्षण कर चुके हैं। उन्होंने यहां बड़ी मात्रा में शालिग्राम पत्थर की मौजूदगी पाई। विज्ञानियों के अनुसार यहां 15-16 करोड़ वर्ष पुराने समुद्री अवसाद सुरक्षित हैं।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के कोर जोन में है लपथल
पिथौरागढ़ वन प्रभाग की 2011 से 2021 तक की प्रबंधन योजना में भी लपथल क्षेत्र को जीवाश्म राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने का सुझाव दिया गया है। पर्यटन विशेषज्ञ अजय भट्ट कहते हैं कि नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के कोर जोन में स्थित लपथल क्षेत्र में अब तक सेना की ही सक्रियता रही है, लेकिन, सड़क निर्माण के बाद आमजन को यहां जाने की अनुमति मिलने से इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। यह कदम नीती घाटी के पर्यटन में मील का पत्थर साबित होगा।







