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ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर में एक बेबी ओरंगुटान को बुखार, इलाज जारी

भुवनेश्वर। बालासोर ज़िले के बिचित्रपुर जंगल से बचाए गए और अभी नंदनकानन चिड़ियाघर में देखभाल पा रहे ओरंगुटान के बच्चों में इंसानों के साथ घुलने-मिलने की आदत दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इससे पता चलता है कि उन्हें पहले इंसानों की देखरेख में रखा गया था।

OUAT में सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ़ हेल्थ (CWH) के प्रमुख आदित्य आचार्य ने कहा कि देखभाल करने वालों के साथ इन बच्चों का सहज व्यवहार बताता है कि वे पहले भी इंसानों की देखरेख में रह चुके हैं। आचार्य ने कहा, “अगर ये ओरंगुटान बच्चे इंसानों की देखरेख में नहीं रहे होते, तो इंसानों के पास आने पर वे कुछ डर दिखाते। लेकिन, बचाए जाने और नए माहौल में लाए जाने के पहले दिन से ही उन्होंने ऐसा कोई डर नहीं दिखाया। इससे पता चलता है कि ओडिशा लाए जाने (या तस्करी करके लाए जाने) से पहले उन्हें काफी समय तक इंसानों की देखरेख में पाला-पोसा गया था।”

आचार्य, जो इन युवा ओरंगुटानों की देखभाल की निगरानी के लिए राज्य के वाइल्डलाइफ़ विंग द्वारा बनाई गई तकनीकी टीम का हिस्सा हैं, ने बताया कि वे धीरे-धीरे नंदनकानन में ‘सेंटर फॉर रियरिंग एनिमल बेबीज़’ में अपनी देखभाल करने वालों के साथ घुल-मिल रहे हैं, हालांकि वे अभी भी क्वारंटीन में हैं।

इन जानवरों की देखभाल तीन समर्पित केयरटेकर कर रहे हैं, जो विशेषज्ञों की सलाह से बनाए गए डाइट प्लान के अनुसार उन्हें हर दो घंटे में दूध, फल और अन्य तरल पदार्थ देते हैं।

सूत्रों के अनुसार, बच्चों में से एक को हल्का बुखार है और उसका पशु चिकित्सक द्वारा इलाज किया जा रहा है। बचाए गए ओरंगुटानों के ब्लड टेस्ट और DNA प्रोफ़ाइलिंग बाद में की जाएगी।

इन पांच ओरंगुटानों को 8 सितंबर को बालासोर के भोगराई ब्लॉक के बिचित्रपुर जंगल से बचाया गया था। क्राइम ब्रांच की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस घटना की जांच तेज़ कर दी है और वाइल्डलाइफ़ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) भी जांच में शामिल है।

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