सीहोर। लाड़कुई वन परिक्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण कानून को ठेंगा दिखाते हुए नीलगाय के निर्मम शिकार का मामला सामने आया है। शिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम संरक्षित प्रजातियों का शिकार कर रहे हैं। लाड़कुई वन परिक्षेत्राधिकारी प्रकाश चंद्र उईके को सूचना मिली कि ग्राम बगलीखेड़ा और गादलिया क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों ने नीलगाय का शिकार किया है। सूचना मिलते ही दो विशेष टीमों का गठन कर रात इलाके में घेराबंदी शुरू की गई। टॉर्च की रोशनी में संदिग्ध गतिविधियां दिखीं, जिससे वन अमला सतर्क हो गया।
टीम ने देखा कि दो युवक मोटरसाइकिल पर बैठे थे और दो अन्य झोला लेकर खड़े थे। जैसे ही वन कर्मियों ने रोका, आरोपी मोटरसाइकिल से भागने लगे, लेकिन खेतों में खड़ी फसल उनके लिए जाल बन गई। मजबूरन गाड़ियां छोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया गया। तलाशी में एक झोले से लगभग पांच किलो नीलगाय का कच्चा मांस बरामद हुआ, जबकि दूसरे झोले से धारदार कुल्हाड़ी और हसिया मिली। पूछताछ में आरोपियों ने अपना नाम शोभाराम बारेला निवासी गादलिया और दीप सिंह बारेला निवासी बसंतपुर-पांगरी बताया। उनके कब्जे से दो मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं।
पूछताछ के बाद वन अमला आरोपियों को घटनास्थल पर ले गया। बगलीखेड़ा और नयापुर बीट की सीमा पर स्थित नाले के पास खून से सनी जमीन, सागौन की खून लगी बल्ली, नीलगाय की पूंछ, हड्डियों के टुकड़े और अन्य अवशेष मिले। दृश्य इतना भयावह था कि जंगल जैसे खामोश होकर इस अपराध का गवाह बना खड़ा था। वन विभाग ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 51 और 52 के तहत मामला दर्ज किया है। रेंजर प्रकाश प्रकाश चंद्र उईके ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह में शामिल अन्य शिकारियों की तलाश के लिए जंगलों में लगातार छापेमारी की जा रही है।







