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कोरबा

स्वच्छ वातावरण में नौनिहाल गढ़ रहे अपना भविष्य, कायाकल्प के बाद प्राथमिक शाला कांसामार बना आकर्षण का केन्द्र


कोरबा।
शिक्षा ग्रहण करने के लिए अगर बच्चों को उचित वातावरण मिले तो निश्चित ही उनका भविष्य एक नई दिशा की ओर अग्रसर होंगे। ऐसे में आगे चलकर बच्चे अपने जीवन के साथ ही देश में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। बच्चों की शिक्षा परिजनों के साथ-साथ शिक्षकों पर पूरी तरह निर्भर रहती है। ऐसा ही कुछ कोरबा जिले के एक स्कूल में देखने को मिल रहा है, जहां बच्चों को स्वच्छ वातावरण देने के लिए स्कूल का कायाकल्प किया गया है, जोकि आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।हम बात कर रहे हैं विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के संकुल केन्द्र बनखेता अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कांसामार की। प्राथमिक शाला कांसामार में बच्चों की दर्ज संख्या 52 है। 2 शिक्षक प्रधान पाठक श्रवण कुमार उइके और एक सहायक शिक्षक रमेश चन्द्र साहू बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। आदिवासी बहुल क्षेत्र में संचालित स्कूल में बच्चों को शिक्षा के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। शिक्षकों द्वारा स्कूल के बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती है। उनकी पूरी दिनचर्या का ध्यान रखा जाता है। जैसे सुबह उठकर स्नान करना, समय पर पढ़ना, भोजन करना और माता पिता की आज्ञा का पालन करना आदि क्रियाओं के बारे में बताया जाता है। बच्चों के जनरल नॉलेज का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसा नहीं लगता कि स्कूल सरकारी है। स्कूल के साथ किचन शेड की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान दिया गया है, जहां बच्चों के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाया जाता है। बच्चों को पौष्टिक आहार के रूप में पपीता, केला, मुसम्मी, संतरा का वितरण किया जाता है। गांव के सरपंच, पंच व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी स्कूल की प्रशंसा की है। प्राथमिक स्कूल का रंगरोगन कर मनमोहक रूप दिया गया है। बच्चों के बैठने के लिए टेबल कुर्सी की व्यवस्था की गई है। स्कूल की दीवारों पर महात्मा गांधी, रविन्द्रनाथ टैगोर, चंद्रशेखर आजाद, इंदिरा गांधी, छत्तीसगढ़ महतारी सहित अन्य महापुरूषांे के छायाचित्र लगाए गए हैं, ताकि बच्चों में सामान्य ज्ञान का विकास हो। स्कूल के चारों ओर गार्डन की तरह विकसित किया गया है। कक्ष में स्वच्छता का विशेष ध्यान दिया जाता है। आसपास गांव के लोग भी स्कूल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। स्कूल के प्रधान पाठक श्रवण कुमार उईके और शिक्षक रमेश चन्द्र साहू बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा प्रदान करते हैं। बच्चों को यह महसूस होने नहीं दिया जाता कि उन्हें शिक्षा दी जा रही है। बच्चों के मानसिक विकास में वृद्धि देखी जा रही है। बच्चों के परिजन भी बच्चों में परिवर्तन देख काफी अचंभित हैं। ग्रामीणों ने प्रधान पाठक व शिक्षक की प्रशंसा की है। परिजन इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि बच्चे आने वाले समय में मुकाम हासिल करेंगे।

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