रांची। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत गुरुवार को रांची में झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में पांच लाख रुपये के इनामी दो एरिया कमांडर सचिन बैक और श्रवण गोप भी शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों को 16 हथियार भी सौंपे। इस कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्रा, सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार ने कहा कि हाल के दिनों में नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया है। उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को अंतिम बड़ा ऑपरेशन किया गया था, जिसके बाद कई नक्सली इधर-उधर चले गए थे। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर अब उग्रवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं और विकास की राह चुन रहे हैं।
अन्य नक्सलियों से भी की आत्मसमर्पण की अपील : आईजी साकेत कुमार ने अन्य नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर सरकार की नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करेंगे तो सुरक्षा बलों का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
आईजी साकेत कुमार ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवारों ने भी लंबे समय तक संघर्ष और कठिनाइयों का सामना किया है। उनके लिए यह एक भावुक और महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि झारखंड को नक्सल मुक्त बनाना और विकास को गति देना सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य है।
डीजीपी बोलीं- भटके लोग अब मुख्यधारा में लौट रहे : वहीं डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि भटके हुए लोग अब समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। डीजीपी ने भरोसा दिलाया कि आत्मसमर्पण करने वालों और उनके परिवारों को सरकार और पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर द्वारा चलाया जा रहा संयुक्त अभियान लगातार सफल हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।







