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कंबोडिया में फर्जी कंपनी को 2-3 हजार यूएस डॉलर में बेचे जाते थे भारतीय

नईदिल्ली । राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कंबोडिया में मानव तस्करी और साइबर गुलामी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। मामले की गहराई से जांच की गई। अब इस मामले में फरार मुख्य आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

मानव तस्करी और साइबर गुलामी के लिए इस गिरोह ने कंबोडिया में फर्जी कंपनी को 2-3 हजार यूएस डॉलर में भारतीय युवाओं को बेचा था। युवाओं को मानसिक और शारीरिक यातनाएं दी गईं। इनमें बिजली के झटके, जबरन कैद, भोजन और पानी से वंचित करना आदि शामिल था। आनंद और उसके चार सह-आरोपियों पर पटना (बिहार) स्थित एनआईए विशेष न्यायालय में दायर चार्जशीट में आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत कई आरोप लगाए गए हैं। आरोप पत्र में शामिल तीन सह-आरोपी उत्तर प्रदेश निवासी अभय नाथ दुबे, बिहार निवासी अभिरंजन कुमार और उत्तर प्रदेश निवासी रोहित यादव को इस वर्ष फरवरी में कंबोडिया से दिल्ली पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था। पांचवें आरोपी, जिसकी पहचान प्रहलाद कुमार सिंह के रूप में हुई है, जो जमानत पर बाहर है।

आरोपियों ने संगठित मानव तस्करी गिरोह के तहत भारतीय युवाओं को वैध नौकरियों और आकर्षक वेतन का झांसा देकर कंबोडिया ले जाने में अहम भूमिका निभाई। पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उन्हें कंबोडिया की फर्जी कंपनियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर उन्हें कठोर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। एनआईए की जांच में पता चला कि आनंद इस गिरोह का सरगना है। वह भारत में विभिन्न सहायक एजेंटों/ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से युवाओं की भर्ती में शामिल था। आरोपी ने कंबोडिया में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पीड़ितों की अवैध तस्करी का प्लान बनाया। वह अपने प्लान में कामयाब भी रहा।

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