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दुष्कर्म पीड़िता के पलटने के बावजूद दोष साबित, DNA रिपोर्ट के आधार 25 साल की सजा

नई दिल्ली। तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 13 वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के मामले में आरोपित उसी के मौसेरे भाई को दोषी ठहराते हुए 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता को 14.50 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने आरोपित को पाक्सो अधिनियम की धारा छह व भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 और 65 के तहत आरोपित को दोषी ठहराया।

विश्वास के घोर उल्लंघन का मामला

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने कहा कि यह मामला विश्वास के घोर उल्लंघन का है, जहां पीड़िता को जिस घर में सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहीं उसके साथ अपराध हुआ।

अदालत ने कहा कि भले ही ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, लेकिन केवल इसी आधार पर अभियोजन के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेष रूप से डीएनए रिपोर्ट, अत्यंत विश्वसनीय और निर्णायक है।

अदालत ने मेडिकल और फारेंसिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि गर्भपात के बाद लिए गए नमूनों की डीएनए जांच से यह स्थापित होता है कि आरोपित ही भ्रूण का जैविक पिता था।

मौसेरे भाई ने कई बार किया दुष्कर्म

अभियोजन के अनुसार, अक्टूबर 2024 में 13 वर्षीय बच्ची को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मेडिकल जांच में उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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