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बिहार

पटना सिटी में घरेलू सिलिंडरों से कमर्शियल में रिफिलिंग का खेल पकड़ाया, 2 गिरफ्तार

पटना सिटी। इन दिनों घरेलू गैस की किल्लत के कारण लंबी लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं, प्रशासन स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहा है। एजेंसियां भी कह रही हैं कि आपूर्ति बढ़ाई गई है। इसके बाद भी ये कतारें क्यों, होम डिलीवरी क्यों नहीं की जा रही है, जिसके कारण उपभोक्ताओं को सुबह से कतार में खड़े होकर धूप में तपना पड़ रहा है। गैस है तो कहां जा रही है। इसे एक उदाहरण भर से समझा जा सकता है, जब रविवार को छापेमारी में पोल खुल गई।

मीना बाजार जल्ला रोड स्थित तालाब के पास छापेमारी की गई, जहां खुले में ही घरेलू गैस को कमर्शियल सिलिंडर में भरा जा रहा था। यहां से 21 घरेलू सिलिंडर बरामद किए गए। दो कमर्शियल सिलिंडर थे। मौके से अभिषेक कुमार नामक एक युवक को गिरफ्तार किया गया, जबकि पुलिस को देख फरार हो गए उसके साथ रंजीत को छापेमारी के बाद पकड़ा गया। दोनों के विरुद्ध आलमगंज थाने में प्राथमिकी की गई है।

पटना सिटी के एसडीओ सत्यम सहाय को मिली सूचना पर उन्होंने सहायक आपूर्ति पदाधिकारी मनोज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम गठित कर छापेमारी का आदेश दिया। टीम में पणन पदाधिकारी आलोक कुमार, बरखा रानी व आलमगंज थाने के पदाधिकारी थे। जब ये मौके पर पहुंचे तो गैस भरी जा रही थी। पुलिस ने एक को तो तुरंत दबोच लिया, लेकिन रंजीत कुमार मौके से भागने में सफल रहा। हालांकि, छापेमारी कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर एक कमरे में छिपाकर रखे पांच और घरेलू सिलिंडर जब्त किए गए। यानी, कुल 26 सिलिंडर। रिफलिंग में प्रयोग होने उपकरण व तराजू भी मिले।

स्थानीय लोगों व अधिकारियों के अनुसार गैस संकट शुरू होने के बाद से ही सुनियोजित ढंग से घरेलू गैस को कमर्शियल सिलिंडर में भरा जा रहा था। ये 26 सिलिंडर किसी न किसी उपभोक्ता के खाते के थे, जिसे चोरी-छिपे या जैसे भी हो, कमर्शियल सिलिंडर में भरने के लिए लाया गया था। चूंकि प्रशासन इस समय ठेले-खोमचे से लेकर होटल-रेस्टोरेंट में घरेलू सिलिंडर पाए जाने पर कार्रवाई कर रहा है, सो इसका भी रास्ता निकाल लिया गया है। उसी गैस को कमर्शियल सिलिंडर में भर दिया जाए, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके।

पुलिस यह पता लगा रही है कि सिलिंडर किस एजेंसी से लाए गए थे। गैस संकट के बाद से यह शिकायतें भी लगातार आ रही हैं कि नंबर लगाने के बाद उपभोक्ताओं को आपूर्ति कर दिए जाने का मैसेज मिल रहा है, पर सिलिंडर पहुंचा ही नहीं। इसकी संभावना व्यक्त की जा रही है कि कहीं इसकी कालाबाजारी तो नहीं हो रही। जहां एक एक सिलिंडर के लिए लोग धूप में पसीना बहा रहे हों, वहां एक साथ 26 सिलिंडर कमर्शियल सिलिंडर में गैस भरने के लिए कैसे उपलब्ध हो गए। इसका अर्थ यही है कि कुछ लोग सिलिंडरों का कृत्रिम संकट उत्पन्न करने में भी जुटे हैं।

एसडीओ सत्यम सहाय ने कहा कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि गैस किस एजेंसी से ली गई थी। अगर किसी एजेंसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी गैस एजेंसियों के स्टॉक व वितरण की स्थिति की नियमित जांच की जा रही है।

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