झारसुगुडा/ ओडिशा। जैसे-जैसे पारंपरिक कलाओं को आधुनिक बाज़ारों में नई पहचान मिल रही है, कारीगरों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना सांस्कृतिक विरासत को बचाने का एक अहम पहलू बन गया है। इस ज़रूरत को समझते हुए, भारत की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी वेदांता एल्युमिनियम ने ‘प्रोजेक्ट वेदकला’ के तहत तीन दिवसीय ‘मीडियम-डेंसिटी फाइबरबोर्ड (MDF) क्राफ्ट और स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप’ आयोजित की। यह प्रोजेक्ट झारसुगुडा में ग्रामीण महिला कारीगरों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक सामुदायिक आजीविका पहल है।
‘फर्स्ट सूत्र फाउंडेशन’, ‘ओडिशा लाइवलीहुड मिशन (OLM)’ और ओडिशा सरकार के ‘हस्तशिल्प विभाग’ के सहयोग से ‘वेदकला एक्सपीरियंस सेंटर’ में आयोजित इस वर्कशॉप में 60 से ज़्यादा महिला कारीगरों को आधुनिक लाइफ़स्टाइल और यादगार तोहफ़े (सवेनियर) वाले उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें पारंपरिक सौरा कला से प्रेरित MDF ज्वेलरी, सजावटी फ्रिज मैग्नेट और की-रिंग शामिल थे। आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए इस कार्यक्रम का समापन कारीगरों को सर्टिफ़िकेट देकर किया गया।
यह वर्कशॉप ‘प्रोजेक्ट वेदकला’ की उस बड़ी कोशिश का ही एक हिस्सा थी, जिसका मकसद ओडिशा की कलात्मक परंपराओं को बचाना और साथ ही उन्हें महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसरों में बदलना है। आदिवासी कला के माहिर कलाकार और राज्य पुरस्कार विजेता श्री गुरख चंद्र नायक के नेतृत्व में आयोजित इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को पारंपरिक सौरा कला के आधुनिक इस्तेमाल के बारे में बताया गया। इसमें झुमके, पेंडेंट, ब्रेसलेट, फ्रिज मैग्नेट और की-रिंग जैसे उत्पाद शामिल थे।
डिज़ाइन, उत्पाद विकास और बाज़ार-उन्मुख कारीगरी में व्यावहारिक प्रशिक्षण के ज़रिए कारीगरों ने अपने उत्पादों की रेंज बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर तलाशने के लिए ज़रूरी कौशल सीखे। ‘प्रोजेक्ट वेदकला’ अभी झारसुगुडा में 100 से ज़्यादा कारीगरों की मदद कर रहा है। उन्हें बांस, सौरा और सबई घास की कारीगरी का प्रशिक्षण दिया जाता है और साथ ही बाज़ार तक पहुँचने की ऐसी पहल की जाती है जिनसे टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा मिले।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, वेदांता एल्युमीनियम – झारसुगुडा के CEO, सी. चंद्रू ने कहा, “ओडिशा की समृद्ध कलात्मक परंपराएं एक अमूल्य सांस्कृतिक विरासत और समुदाय के नेतृत्व वाली आर्थिक प्रगति के लिए एक बड़ा अवसर, दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ‘प्रोजेक्ट वेदकला’ के माध्यम से, हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां महिला कारीगर अपनी स्किल्स को बेहतर बना सकती हैं, आधुनिक डिज़ाइन अपना सकती हैं और आजीविका के नए अवसर पा सकती हैं। हमारी कोशिश है कि इन महिलाओं को आत्मविश्वास से भरे उद्यमी बनने में मदद की जाए और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सौरा जैसी पारंपरिक कला शैलियाँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक, मूल्यवान और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहें।”

पात्रापाली की एक प्रतिभागी कारीगर, झरना भूषण ने कहा, “इस ट्रेनिंग ने हमें दिखाया कि जिन पारंपरिक कला शैलियों के बीच हम बड़े हुए हैं, उन्हें रोज़मर्रा के उत्पादों में कैसे आसानी से ढाला जा सकता है। इन तकनीकों को सीखने से हमें नए विचार और ऐसे उत्पाद बनाने का आत्मविश्वास मिला है जो ज़्यादा ग्राहकों को पसंद आ सकते हैं। हमें उम्मीद है कि ये स्किल्स हमें टिकाऊ आजीविका कमाने में मदद करेंगी और साथ ही उस कला को भी बचाए रखेंगी जो हमें विरासत में मिली है।”
‘प्रोजेक्ट वेदकला’ जैसी पहलों के माध्यम से, वेदांता एल्युमीनियम ओडिशा की समृद्ध कलात्मक विरासत को बचाते हुए महिलाओं के नेतृत्व वाली आजीविका को बढ़ावा दे रहा है। यह प्रोग्राम कंपनी के व्यापक सामुदायिक विकास प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें टिकाऊ आजीविका, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, पानी और स्वच्छता, सामुदायिक बुनियादी ढांचा, जैव विविधता संरक्षण और ज़मीनी स्तर पर खेल और संस्कृति शामिल हैं। इन्हें सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी में लागू किया जाता है। ओडिशा के प्रति वेदांता एल्युमीनियम की प्रतिबद्धता उसके कामकाज से कहीं आगे तक फैली हुई है। अकेले FY26 में, इसके सामाजिक प्रभाव कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आजीविका बढ़ाने के क्षेत्रों में 8 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच बनाई। वेदांता एल्युमीनियम राज्य में समावेशी विकास और टिकाऊ सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना जारी रखे हुए है।







