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कोरबा छत्तीसगढ़

उपभोक्ताओं के रसोई घर में पाईप लाइन से पहुंचेगी कुकिंग गैस, कई झंझट से मुक्ति

कोरबा/जांजगीर। शहरों में अब रसोई गैस सिलेंडर की निर्भरता धीरे-धीरे खत्म होने की तैयारी है। राज्य सरकार की छत्तीसगढ़ शहरी गैस वितरण नीति-2026 लागू होने के बाद घरों तक पाइप लाइन के जरिए पाइप्ड नेचुरल गैस और वाहनों के लिए सीएनजी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में मई में राजपत्र प्रकाशित होने के बाद संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने सभी नगरीय निकायों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

नीति राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में लागू होगी। इसके तहत जांजगीर, नैला, चांपा, अकलतरा, बलौदा, नवागढ़, शिवरीनारायण समेत जिले के सभी नगरीय निकाय व सक्ती, डभरा, चंद्रपुर, नया बाराद्वार और अड़भार सहित सभी शहरी क्षेत्रों में गैस पाइप लाइन और सीएनजी नेटवर्क विकसित किया जाएगा। निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि शहरों के मास्टर प्लान में सीएनजी स्टेशनों के लिए भूमि आरक्षित की जाए। साथ ही नए मकानों और व्यावसायिक भवनों में निर्माण के दौरान ही गैस पाइप लाइन का बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

सरकार दो माह के भीतर ऑनलाइन आवेदन और अनुमति के लिए सिंगल विंडो पोर्टल शुरू करेगी। कंपनियों को आवेदन के बाद 15 कार्य दिवस के भीतर अनुमति दी जाएगी। यदि तय अवधि में संबंधित विभाग अनुमति नहीं देता है, तो इसे स्वीकृत माना जाएगा और कंपनी कार्य शुरू कर सकेगी। अनुमान है कि अगले एक-दो माह में सड़क़ों के किनारे पाइप लाइन बिछाने का काम तेज हो जाएगा।

कंपनियों के लिए तय किए गए शुल्क- राइट ऑफ वे के लिए कंपनियों को 1000 प्रति किलोमीटर शुल्क देना होगा। 5-10 वर्गफीट तक के गैस वाल्व चेंबर पर व्यावसायिक दर का केवल 10 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। सड़क़ खोदने और उसकी मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए बैंक गारंटी जमा करना अनिवार्य रहेगा।

ऐसे बिछेगी पाइप लाइन

केवल केंद्र सरकार और पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (पीएनजीआरबी) से अधिकृत कंपनियां ही गैस पाइप लाइन बिछा सकेंगी। सड़क़ खोदने से पहले कंपनियों को बैंक गारंटी के रूप में सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। पाइप लाइन बिछाने के बाद सड़क़ को पहले जैसी स्थिति में बहाल करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी।

सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था

गैस रिसाव या दुर्घटना से निपटने के लिए कलेक्टर की निगरानी में हर वर्ष मॉक ड्रिल होगी। कंपनियों के लिए पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य रहेगा। गैस रिसाव की स्थिति में कार्यरत वाहनों को एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की तरह इमरजेंसी वाहन का दर्जा मिलेगा।

लोगों को होंगे ये बड़े फायदे

रसोई गैस खत्म होने और सिलेंडर बुकिंग की चिंता नहीं रहेगी। डिलीवरी और वेटिंग की परेशानी समाप्त होगी। एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पीएनजी अपेक्षाकृत सस्ती होगी। सिलेंडर बदलने और लीकेज का जोखिम कम होगा।

तीन स्तर पर होगी निगरानी

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन स्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति। खाद्य संचालक की अध्यक्षता में टास्क फोर्स। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति।

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