नई दिल्ली। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने वर्ष 2025-26 के दौरान ऑनलाइन टिकट बुकिंग और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। एक ओर जहां डिजिटल माध्यम से टिकट बुकिंग का दायरा लगातार बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर फर्जी खातों, संदिग्ध गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए आईआरसीटीसी ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है।
निगम ने वर्ष 2025 के दौरान 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी निष्क्रिय कर दीं। इसके साथ ही लाखों संदिग्ध पीएनआर और करोड़ों यूजर खातों की जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। आईआरसीटीसी के अनुसार रेलवे यात्रियों को टिकट बुकिंग में निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने और दलालों तथा फर्जी खातों के जरिए होने वाली अनियमितताओं को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा अभियान को और मजबूत किया गया है। विशेष रूप से तत्काल टिकट बुकिंग जैसी अत्यधिक व्यस्त अवधि में वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता दिलाने के लिए उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 के दौरान आईआरसीटीसी ने प्रतिदिन औसतन 14.53 लाख टिकटों की बुकिंग दर्ज की। यह आंकड़ा वर्ष 2024-25 के औसत 13.88 लाख दैनिक टिकट बुकिंग की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इससे साफ है कि रेलवे यात्रियों का ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है और डिजिटल माध्यम रेलवे आरक्षण का प्रमुख विकल्प बन चुका है।
आईआरसीटीसी ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय किया गया। इसके अलावा 6.05 करोड़ संदिग्ध खातों को पुनः सत्यापन प्रक्रिया के तहत रखा गया, ताकि उनकी वास्तविकता की जांच की जा सके और सिस्टम के दुरुपयोग को रोका जा सके। निगम ने फर्जी डिजिटल पहचान के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए 13,343 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए।
साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए आईआरसीटीसी ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर भी काम किया। निगम की ओर से राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर 501 शिकायतें दर्ज कराई गईं। ये शिकायतें 4.18 लाख संदिग्ध पीएनआर से संबंधित थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।







