सर्वाइकल कैंसर, जिसे हिंदी में ग्रीवा कैंसर भी कहा जाता है। महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य कैंसर है। इसके बावजूद आज भी महिलाएं इस बीमारी को लेकर जागरूक नहीं है। इसलिए, 17 नवंबर को World Cervical Cancer Elimination Day of Action मनाया जाता है। यह दिन सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने और लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में, यह एक प्रयास है और दुनिया भर के संगठन और स्वास्थ्य पेशेवर इस दिन को मनाने के लिए मिलकर काम करते हैं।
अगर, शुरुआती चरण में ही सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों और जोखिम वाली उम्र को समझना बहुत जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर के प्रारंभिक लक्षण- सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं, इसलिए कई महिलाओं को शुरुआत में इसका पता ही नहीं चलता। शुरुआती संकेतों में अनियमित योनि रक्तस्राव शामिल है जैसे पीरियड्स के बीच में खून आना, संभोग के बाद स्पॉटिंग होना या मेनोपॉज़ के बाद भी ब्लीडिंग होना। इसके अलावा, योनि स्राव (वजाइनल डिस्चार्ज) में बदलाव, जैसे गंध आना, रंग बदलना या मात्रा बढ़ जाना भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। कुछ महिलाओं को पेल्विक दर्द, कमर या पैरों में दर्द महसूस हो सकता है, खासकर जब कैंसर आसपास के ऊतकों में फैलने लगे।
30 से 50 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा खतरा? – जहाँ तक उम्र की बात है, सर्वाइकल कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा 30 से 50 वर्ष की महिलाओं में देखा जाता है हालांकि HPV संक्रमण जल्दी उम्र में भी हो सकता है, लेकिन कैंसर बनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है और आमतौर पर 30 की उम्र के बाद इसका जोखिम बढ़ने लगता है। वे महिलाएँ जो नियमित पाप स्मीयर या HPV टेस्ट नहीं करातीं, उनमें खतरा और भी अधिक होता है।
अच्छी बात यह है कि सर्वाइकल कैंसर को स्क्रीनिंग और HPV वैक्सीन से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए 21 वर्ष के बाद नियमित जांच और समय पर टीकाकरण हर महिला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कैसे बचें? – अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सावधानियों से इस बीमारी से बचा जा सकता है
- HPV वैक्सीन लगवाएं – 9 से 14 साल की लड़कियों के लिए जरूरी, 26 साल तक की महिलाएं इसे जरूर लें। कुछ मामलों में 45 साल तक भी वैक्सीन दी जा सकती है।
- पैप स्मीयर और HPV टेस्ट – 21 साल से शुरू करके हर 3 साल में टेस्ट करवाएं।
- धूम्रपान छोड़ें
- स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं – फल, सब्ज़ियां, और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार लें।
- नियमित डॉक्टर से जांच कराएं, खासकर अगर कोई लक्षण दिखे।







