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उत्तर प्रदेश

दुष्कर्म के झूठे आरोप से 4.5 साल बाद युवक बरी, आगरा कोर्ट के आदेश से युवती पर एफआईआर

आगरा। दुष्कर्म और जान से मारने की कोशिश के मुकदमे में युवक को साढ़े चार साल जेल में बिताने पड़े। सत्र परीक्षण में उसके ऊपर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए। मेडिकल रिपोर्ट में भी युवती से दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 19 मामले में सख्त रुख अपनाया है।

उन्होंने युवक को बरी करते हुए फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाली युवती के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश हरीपर्वत थाना पुलिस को दिए। न्यायालय के आदेश पर इंस्पेक्टर हरीपर्वत ने युवती के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

नगला बैनी निवासी आरती ने एक दिसंबर 2021 को हरीपर्वत थाने में गाधा पाड़ा माल गोदाम के पास रहने वाले वरुण के खिलाफ दुष्कर्म व जान से मारने की कोशिश करने का मुकदमा दर्ज कराया था। युवती ने दर्ज मुकदमे में कहा था कि युवक से उसकी आठ साल से जान पहचान थी। युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। वरुण से शादी करने के लिए कहा तो 30 नवंबर 2021 को सर्या पार्क में बुलाकर जान से मारने की नियत से नशीला पदार्थ खिला दिया।

साबित नहीं हुआ दुष्कर्म का आरोप

पुलिस ने वरुण को गिरफ्तार किया, न्यायालय से उसे जेल भेजा गया। पुलिस की ओर से वरुण के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। न्यायालय ने 11 जुलाई 2022 को मुकदमे को सत्र परीक्षण के लिए दर्ज किया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर 19 की अदालत में वरुण के ऊपर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए।

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