वाराणसी। रोजा इफ्तार पार्टी के नाम पर गंगा नदी में चिकन बिरयानी खाने और नदी में हड्डी फेंकने के मामले में गिरफ्तार 14 आरोपियों की जमानत याचिका बुधवार को न्यायालय ने खारिज कर दी है। एक दिन पहले ही कोर्ट में इस मामले में 14 आरोपियों की तरफ से पैरवी कर रहे वकील पर भी दूसरे पक्ष के वकीलों ने सवाल उठाए थे और वकालतनामा किसी और का और पर भी किसी और की तरफ से किए जाने की बात कही गई थी, जिस पर कोर्ट ने भी आपत्ति जताते हुए ऐसा न करने की हिदायत दी थी। इस मामले में आज जमानत खारिज होने के बाद सभी आरोपियों को फिर से जेल भेज दिया गया।
बता दें कि बीते दिनों भी 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। एसीपी कोर्ट ये याचिका खारिज की थी, जिसके बाद सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर भेजे गए थे। दो दिन बाद कोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले को लेकर सियासत भी हुई। एक तरफ भाजपा ने इसे गलत बताया था तो वहीं विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताया था। हालांकि सपा से पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस इफ्तार को गलत बताया था, लेकिन दूसरी तरफ उनके नेता अखिलेश यादव इस मामले में पुलिस की ही चुटकी ले रहे थे। अखिलेश ने कहा था कि पुलिस को इफ्तार पार्टी नहीं दी होगी इसलिए ये कार्रवाई हुई।
ये है पूरा मामला
दरअसल, बनारस में गंगा नदी पर सोमवार शाम एक युवक ने रोजा इफ्तार का कार्यक्रम रखा था। उसने रोजेदारों को गंगा घाट पर बुलाया। यहां एक बड़ी नाव पहले से बुक की गई थी। इसके बाद सभी लोग अस्सी घाट से नमो घाट तक नाव से गए, वहां नाव पर मौजूद रोजेदारों ने पहले नमाज पढ़ी. फिर खजूर और फल खाकर रोजा खोला। दूसरे वीडियो में नाव पर बैठे लोग बड़े भगोने से कुछ निकालकर खाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद वबाल मच गया।







