Hanuman Jayanti 2026 : अगर आप सुबह हनुमान जी की आरती या पूजा नहीं कर पाए हैं तो कोई बात नहीं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त। इस समय आप हनुमान जी की आरती कर शुभ फल की प्राप्ति कर सकते हैं।
आज 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार हनुमान जयंती वाले दिन अगर भगवान हनुमान जी की पूजा की जाए तो सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। आज सुबह हनुमान जी की पूजा का सबसे अच्छा मुहूर्त था जो कि अब निकल चुका है। अगर आप अभी तक बजरंगबली की पूजा नहीं कर पाए हैं और शाम में मंदिर जाने की सोच रहे हैं तो शाम वाले शुभ मुहूर्त के बारे में जान लें।
कई लोग शुभ मुहूर्त के निकल जाने का अफसोस भी कर रहे होंगे, लेकिन ऐसा ना करें क्योंकि शाम का शुभ मुहूर्त अभी बाकी है। इस समय हनुमान जी की पूजा करना आपके लिए उतना ही फलदायी साबित होगा।
शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त : शाम को पूजा के लिए 1 घंटे 27 मिनट का शुभ मुहूर्त है। हिंदू पंचांग के हिसाब से आज शाम 6 बजकर 39 मिनट से लेकर 8 बजकर 6 मिनट के बीच पूजा की जा सकती है। ऐसे में इस शुभ मुहूर्त में आज आप बजरंगबली की पूजा-अर्चना जरूर करें। हनुमान जी की आरती करने से पुण्य लाभ की प्राप्ति होगी। श्रीराम भक्त हनुमान को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका है उनकी चालीसा और आरती। जिसके लिरिक्स हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।
हनुमान चालीसा लिरिक्स
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
हनुमान चालीसा चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनन्दन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन॥
विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रुप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिकपाल जहाँ ते।
कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक ते कांपै॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
महावीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट ते हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु सन्त के तुम रखवारे।
असुर निकन्दन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अंतकाल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाई।
कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥
जो शत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
हनुमान चालीसा दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
हनुमान जी की आरती
- आरती कीजै हनुमान लला की।
- दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
- जाके बल से गिरिवर कांपे।
- रोग दोष जाके निकट न झांके॥
- अंजनि पुत्र महा बलदाई।
- संतन के प्रभु सदा सहाई॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
- दे बीरा रघुनाथ पठाए।
- लंका जारि सिया सुधि लाए॥
- लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।
- जात पवनसुत बार न लाई॥
- लंका जारि असुर संहारे।
- सियारामजी के काज सवारे॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
- लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
- आनि संजीवन प्राण उबारे॥
- पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
- अहिरावण की भुजा उखारे॥
- बाएं भुजा असुरदल मारे।
- दाहिने भुजा संतजन तारे॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
- सुर नर मुनि आरती उतारें।
- जय जय जय हनुमान उचारें॥
- कंचन थार कपूर लौ छाई।
- आरती करत अंजना माई॥
- जो हनुमान जी की आरती गावे।
- बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
- आरती कीजै हनुमान लला की।
- दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
- आरती कीजै हनुमान लला की।।
डिस्क्लेमर : उक्त लेख धार्मिक आस्था व लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Today Studio उत्तरदायी नहीं है।







