स्वदेशी ‘नाविक’ दिखाएगा राह
श्रीहरिकोटा। भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी वैज्ञानिक क्षमता का अहसास कराया है। अब भारत विदेशी नेविगेशन प्रणालियों के भरोसे नहीं रहेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ (नेविगेशन विद इंडियन कान्स्टेलेशन) को नई शक्ति देने के लिए अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में स्थापित कर दिया है। इसके साथ ही स्वदेशी ‘नाविक’ बेहद शक्तिशाली और सटीक हो गया है।
भारत के लोग अब अपने नेविगेशन सिस्टम का उपयोग कर सकेंगे
यह सफलता भारत की ताकत को दर्शाती है जो अत्याधुनिक तकनीक के लिए केवल दूसरे देशों की ओर देखने के बजाय अपनी क्षमताओं के बल पर आगे बढ़ रहा है। भारत के लोग अब अपने नेविगेशन सिस्टम का उपयोग कर सकेंगे। अब भारत की स्वदेशी नेविगेशन तकनीक का दायरा केवल सैन्य और विशेष तकनीकी जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी इसका महत्व बढ़ेगा।
यह सफलता महज एक उपग्रह को अंतरिक्ष में पहुंचाने की उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत के अपनेविगेशन नेटवर्क को मजबूत करने और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम है। विदेशी जीपीएस पर निर्भरता कम करने की इस पहल से भारत की सामरिक स्वायत्तता को भी नई मजबूती मिलेगी।
50 मीटर ऊंचे और तीन चरणों वाले जीएसएलवी-एफ18 राकेट ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर एनवीएस-03 के साथ सफलता की उड़ान भरी और 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 को निर्धारित भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा या जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में स्थापित कर मिशन पूरा किया।







