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मधुमक्खी पालन से बेहतर आजीविका तक : VAML की ‘वेदमृत’ पहल झारसुगुड़ा के ग्रामीण किसानों को बना रही सशक्त

वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन के ज़रिए, वेदांता एल्युमिनियम किसानों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार करने और टिकाऊ आजीविका बनाने में मदद कर रहा है।

ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के भुगरापाली गाँव के खेतों में, धान और सब्जियों की फसलों के बीच अब मधुमक्खियों की भिनभिनाहट भी सुनाई देती है। किसान क्षिरोद्र पटेल के लिए, ये नन्ही मधुमक्खियाँ एक बेहतरीन अवसर लेकर आई हैं। अपने छह एकड़ खेत में खेती करने के साथ-साथ, वे अब मधुमक्खी पालन से सालाना लगभग 25,000 रुपये कमा रहे हैं, जिससे उनके सात सदस्यों वाले परिवार के लिए आय का एक अतिरिक्त ज़रिया बन गया है। जो शुरुआत सिर्फ तीन मधुमक्खी बक्सों से हुई थी, वह अब आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है। यह पारंपरिक खेती के साथ-साथ उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा को भी मज़बूत कर रही है।

क्षिरोद्र की यह कहानी ‘वेदमृत’ पहल से जुड़ी कई सफल कहानियों में से एक है। ‘वेदमृत’ भारत की सबसे बड़ी एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी, वेदांता एल्युमिनियम की एक आजीविका पहल है। ग्रामीण समुदायों को वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन से जोड़कर, यह कार्यक्रम किसानों को अपनी आय के स्रोत बढ़ाने और प्राकृतिक परागण (pollination) के ज़रिए कृषि उत्पादकता में सुधार करने में मदद कर रहा है। व्यावहारिक प्रशिक्षण, मधुमक्खी बक्सों के वितरण और लगातार तकनीकी सहायता के माध्यम से, ‘वेदमृत’ परिवारों को एक छोटे से प्रयास को कमाई और विकास के एक टिकाऊ स्रोत में बदलने में सक्षम बना रहा है।

क्षिरोद्र के लिए इसके परिणाम बहुत उत्साहजनक रहे हैं। अपने पहले तीन मधुमक्खी बक्से मिलने के तीन महीने के भीतर ही, उन्होंने लगभग 23 किलोग्राम शहद निकाला। जैसे-जैसे मधुमक्खियों की कॉलोनियाँ बढ़ीं, उन्होंने कॉलोनियों को बेचने का काम भी शुरू कर दिया। बेहतर परागण की वजह से सब्जियों की पैदावार में भी लगभग 30% की वृद्धि हुई, जो यह दिखाता है कि कैसे मधुमक्खी पालन पारंपरिक खेती का एक बेहतरीन पूरक हो सकता है। आस-पास के गाँवों में भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

सलेपाली गाँव की मंजरी प्रधान, जो लंबे समय से घर की ज़िम्मेदारियों और खेती के काम के बीच संतुलन बना रही थीं, उन्हें ‘वेदमृत’ के ज़रिए एक नया अवसर मिला। उन्होंने एक मधुमक्खी बक्से से शुरुआत की और आठ लीटर शहद निकाला। इससे उन्हें न केवल आय का एक अतिरिक्त स्रोत मिला, बल्कि उनका आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। मंजरी बताती हैं, “मधुमक्खी पालन सीखने से मुझे कुछ नया करने का आत्मविश्वास मिला। मैंने सिर्फ एक ‘बी बॉक्स’ (मधुमक्खी बक्से) से शुरुआत की थी, और आज मैं शहद निकालकर उससे कमाई कर सकती हूँ। अपने परिवार की आय में योगदान दे पाना मेरे लिए बहुत मायने रखता है।”

बुचामुंडा में, 67 वर्षीय राजकुमारी महार ने अपने मौजूदा आजीविका के कामों के साथ मधुमक्खी पालन को भी जोड़ लिया। उन्होंने अपने पहले ‘बी बॉक्स’ से पाँच लीटर शहद निकाला। वहीं, सलेपाली की प्रतिमा सुनानी ने अपने परिवार के पाँच एकड़ के सब्जी के खेत में मधुमक्खी पालन शुरू किया और तीन महीने के भीतर आठ किलोग्राम शहद निकाला। ये अलग-अलग सफलताएँ ‘वेदमृत’ (Vedamrit) के बढ़ते सामुदायिक प्रभाव को दर्शाती हैं। इस पहल के ज़रिए 20 गाँवों के 526 किसानों ने वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन अपनाना शुरू किया है, और अब इसे 1,500 मधुमक्खी पालकों तक पहुँचाने की योजना है। पिछले एक साल में, इसमें शामिल किसानों ने कुल मिलाकर 2,000 लीटर से ज़्यादा बेहतरीन गुणवत्ता वाला शहद निकाला है, जिससे ग्रामीण परिवारों की अतिरिक्त आय हुई है।

वैल्यू चेन (मूल्य श्रृंखला) को मज़बूत करने के लिए, वेदमृत ने कोलाबिरा में एक आधुनिक शहद प्रसंस्करण संयंत्र (honey processing plant) भी स्थापित किया है। यहाँ शहद निकालने, उसे प्रोसेस करने और पैक करने की सुविधा मौजूद है। इस केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों को गुणवत्ता के मानकों को पूरा करने, अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ाने और प्रीमियम बाज़ारों तक पहुँचने में मदद करना है, ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पादित शहद को बड़े व्यावसायिक अवसरों से जोड़ा जा सके।

वैज्ञानिक तकनीकों, किसानों के सामूहिक प्रयासों, प्रसंस्करण के बुनियादी ढाँचे और बाज़ार तक पहुँच को एक साथ लाकर, वेदमृत ग्रामीण आजीविका के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है जिसे आगे और बढ़ाया जा सकता है। आय बढ़ाने के अलावा, यह पहल परागण (pollination) के ज़रिए जैव विविधता को भी बढ़ावा देती है और किसानों को अपने मौजूदा कृषि संसाधनों का बेहतर और उत्पादक उपयोग करने में मदद करती है।

क्षिरोद्रा, मंजरी, राजकुमारी और प्रतिमा के लिए, एक ‘बी बॉक्स’ का मतलब सिर्फ शहद का उत्पादन नहीं है। यह उन्हें नई संभावनाओं को तलाशने का आत्मविश्वास देता है और एक ज़्यादा सुरक्षित भविष्य बनाने का अवसर प्रदान करता है। ‘वेदमृत’ के माध्यम से, वेदांता एल्युमिनियम लगातार यह दिखा रहा है कि कैसे समुदाय पर केंद्रित पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत कर सकती हैं और एक अधिक टिकाऊ कृषि पारिस्थितिकी तंत्र (agricultural ecosystem) बनाने में योगदान दे सकती हैं।

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