नारायणगढ़ (अंबाला)। गरीबी और अनपढ़ता ने फिर एक मासूम बचपन को जबरन जिम्मेदारियों और अपराध की आग में झोंक दिया। 13 वर्षीय बच्ची, जिसकी शादी केवल तीन महीने पहले हुई थी, अब एक महीने की गर्भवती है। दूल्हा भी नाबालिग है, उम्र महज 15 साल है।
हैरानी की बात यह है कि नाबालिग विवाहिता के देवर की उम्र सिर्फ तीन साल है, जबकि ससुर की उम्र 35 और सास 29 साल की है। यह किसी फिल्मी कहानी की पटकथा नहीं, बल्कि हकीकत है।
इस मामले में नारायणगढ़ महिला थाना ने पाक्सो एक्ट और चाइल्ड मैरिज एक्ट के तहत जीरो एफआइआर दर्ज कर ली है और केस अब लुधियाना के मुल्लांपुर दाखा थाना पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया है। वहां की पुलिस ने भी दोनों परिवारों पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बचपन से शादी और जिम्मेदारी तक
नाबालिग विवाहिता गर्भवती की जन्मतिथि दो अगस्त 2012 दर्ज है। बावजूद इसके 10 जून 2025 को उसकी शादी 15 वर्षीय किशोर से कर दी गई। दोनों परिवार मूलरूप से बिहार निवासी हैं और लुधियाना के मुल्लांपुर दाखा में किराये के मकान में रह रहे थे।
गरीबी और अनपढ़ता ने माता-पिता को मजबूर किया कि वे अपनी बेटी का बचपन ही समाप्त कर दें। शादी के बाद दोनों दंपत्ति हिमाचल प्रदेश के कालाअंब में मजदूरी करने लगे। यहां उनके हाथों में किताब की जगह औजार थम दिए गए और खिलौनों की जगह जिम्मेदारियां बैठ गईं। हाल ही में वे नारायणगढ़ की शिव कालोनी में रहने लगे।







