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जांजगीर-चांपा

जेल कस्टडी में नितेश वीरानी की मौत.. समाज में भड़का आक्रोश, उच्चस्तरीय कमेटी से जांच की मांग

जांजगीर- चांपा। परिजनों का कहना है कि जिस केस में आरोपी को बंदी बनाया गया था, वह संपूर्ण लेनदेन प्रक्रिया में केवल गवाह था। उसके बाद भी उसे मुख्य आरोपियों के रूप एफआईआर में बिना वैध साक्ष्य नाम दर्ज किया। परिजनों का कहना है कि घटना के दो दिन पूर्व जेल में मिलने गए थे, तब वह बिल्कुल स्वस्थ्य था। अचानक उसकी मौत को लेकर परिजनों ने संदेह व्यक्त किया है। परिजनों ने मामले में जेल प्रशासन पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।

आपकों बता दें कि जमीन संबंधी एक मामले में नितेश विरानी जिला जेल जांजगीर में निरूद्ध बंदी था। परिजनों का कहना है कि बीते 17 जून की शाम नितेश के संबंध में सूचना मिली, जबकि उसे सुबह से ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि नितेश का स्वास्थ्य खराब था। इसके बावजूद जान-बुझकर उसे उच्च स्तरीय उपचार देने में विलंब किया गया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। तीसरे दिन चांपा के अंबेडकर भवन में नितेश का पगड़ी रस्म हुआ, जिसमें समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। उन्होंने मीडिया से भी इस पूरे घटनाक्रम में बात की और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करते हुए इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

परिजन सहित सिंधु समाज ने कलेक्टर से जिन बिंदुओं पर उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है, उसमें जेल अभिरक्षा में प्रताड़ना से मौत कैसे हुई, इलाज के दौरान नितेश के शरीर में चोटों के निशान, बीमारी की सूचना जेल प्रशासन ने परिजनों को क्यों नहीं दी, जिला अस्पताल में भर्ती की सूचना बाहरी लोगों से प्राप्त क्यों हुई, जेल प्रशासन की प्रताड़ना से घायल युवक द्वारा निरंतर अपनी बिगड़ी तबियत की एवं बैचेनी की जानकारी बैरक में तैनात सुरक्षा व्यवस्था प्रहरी को दी जाती रही, उसके बाद भी समय में उपचार में कोताही क्यों बरती गई, जिला अस्पताल में भी समुचित इलाज की सुविधा क्यों नहीं मिली। जिला अस्पताल में डिस्चार्ज के बाद भी बीमार व्यक्ति के उपचार छोड़ कागजी कार्रवाई के लिए 3 घंटे तक अनावश्यक विलंब क्यों किया गया, जेल प्रशासन द्वारा जिला अस्पताल से डिस्चार्ज उपरांत पुनः कागजी कार्रवाई के लिए पुनः एम्बुलेंस को जेल में बुलाकर प्रताड़ना क्यों दी गई, पुलिस व जेल प्रशासन की संपूर्ण कार्रवाई पर सभी तथ्यों की बारिकी से न्यायिक जांच की जाए। संपूर्ण घटना चक्र का वीडियो फुटेज, डॉक्टरी जांच विवरण एवं पोस्टमार्टम की रिपोर्ट परिजनों को सौंपी जाए, शव परिजनों को सौंपे जाने पर विलंब और उपस्थित पुलिस कर्मियों द्वारा परिजनों से दुर्व्यवहार आदि मांग शामिल है।

पूज्य सिंधी पंचायत व सिंधु युवा सेवा समिति ने पगड़ी रस्म उपरांत जेल प्रशासन पर अपना आक्रोश जताते हुए नितेश विरानी के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग की है, जिसमें नितेश विरानी की जेल अभिरक्षा में हुई मौत की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने, आश्रित को सरकारी नौकरी देने, बच्चों की निःशुल्क शिक्षा की गारंटी देने, आश्रित पत्नी एवं दो मासूम छोटी बेटियों के पालन पोषण के लिए 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग शामिल है।

 

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