रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस, यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए तैयार और इच्छुक है। लेकिन इसके लिए कीव को कुछ ‘समझौते’ करने होंगे। उन्होंने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के संदर्भ में कही। पुतिन ने साथ ही यह भी कहा कि रूसी सेना जंग के मैदान में लगातार आगे बढ़ रही है।
पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत की। पुतिन ने कहा कि रूस अपनी वायु रक्षा को मजबूत कर रहा है, ताकि यूक्रेन के ड्रोन हमलों का जवाब दिया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी लोगों की देशभक्ति और इच्छाशक्ति उनके लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी।
जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र : इसी बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पुतिन को एक खुला पत्र लिखा। जेलेंस्की ने दोनों नेताओं के बीच सीधी बैठक की अपील की, ताकि युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके। जेलेंस्की ने कहा, शांति तभी संभव है जब दोनों देश सीधे बातचीत करें। उन्होंने पूर्ण युद्धविराम की भी मांग की। क्रेमलिन ने पुष्टि की कि उसे यह पत्र मिल गया है।
यूक्रेन के स्वीकार करने होंगे समझौते, तभी खत्म होगी जंग’ : पत्रकारों से बातचीत में पुतिन ने कहा कि रूस उन प्रस्तावों के आधार पर समझौते के लिए तैयार है, जिन पर ट्रंप के साथ अलास्का के एंकोरेज में हुई बैठक में चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा कि रूस उन ‘समझौतों’ को मानने को तैयार है। लेकिन यूक्रेन को भी इन्हें स्वीकार करना होगा, तभी संघर्ष जल्दी खत्म हो सकता है।
पुतिन ने यह भी दावा किया कि रूसी सेना ने हाल ही में करीब 2440 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है और कई मोर्चों पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लुहांस्क क्षेत्र करीब पूरी तरह रूस के नियंत्रण में है, डोनेत्स्क का 85 फीसदी और जापोरिज्जिया का करीब 80 फीसदी हिस्सा भी रूस के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन चाहता है कि रूस अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दे। लेकिन बेहतर होगा कि युद्ध को पूरी तरह खत्म करने के लिए आपसी समझौता किया जाए। पुतिन के अनुसार रूसी सेना हर मोर्चे पर आगे बढ़ रही है।
ईयू की मध्यस्थता की भूमिका पर क्या कहा? : पुतिन ने यूरोपीय संघ (ईयू) की मध्यस्थता की भूमिका को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने रूस को रणनीतिक रूप से हराने की बात की है, उन पर भरोसा करना मुश्किल है। उन्होंने कहा, अगर ईयू बातचीत करना चाहता है, तो रूस के दरवाजे इसके लिए पूरी तरह बंद नहीं है। लेकिन वह हथियार भेजने के बजाय यूक्रेन को समझाने की कोशिश करे।
यूक्रेन में चुनाव पर भी टिप्पणी की : उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यूक्रेन में चुनाव होंगे या नहीं। उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की की वैधता पर भी टिप्पणी की। हालांकि, यूक्रेन में मार्शल लॉ के कारण चुनाव स्थगित हैं।
पुतिन ने पश्चिमी देशों पर यूक्रेन को ड्रोन और हथियार देने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ ड्रोन रूस के अंदर तक हमला कर सकते हैं। उन्होंने रूस की ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल का भी जिक्र किया और कहा कि इसे अभी तक यूक्रेन पर पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया है, केवल परीक्षण के तौर पर इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल बड़े शहरों में भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जिनेवा, अबू धाबी और इस्तांबुल में हुई बैठकों के बाद भी शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई है और 2022 में शुरू हुए युद्ध के बाद स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
अर्थव्यवस्था के मामले पर क्या कहा? : रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन ने यह भी कहा कि आर्थिक आकार के मामले में ब्रिक्स बहुत पहले ही जी-7 को पीछे छोड़ चुका है और आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ने वाला है। पुतिन ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जबकि पश्चिमी देशों की आर्थिक हिस्सेदारी कम होती जा रही है। सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित वार्षिक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए पुतिन ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने एकतरफा प्रतिबंध लगाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि रूस की विदेश में रखी गई संपत्तियों को जब्त करके पश्चिमी देशों ने अपनी ही मुद्राओं पर लोगों का भरोसा कमजोर कर दिया है। पुतिन ने कहा, रूस के संप्रभु भंडार को जब्त करने और प्रतिबंध लगाने से अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं, खासकर डॉलर और यूरो की स्थिति पर स्थायी असर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि रूस की तरह कोई भी अन्य देश भी अपने वैध डॉलर या यूरो आधारित संसाधनों और पश्चिमी वित्तीय तथा भुगतान प्रणालियों तक पहुंच खो सकता है। पुतिन ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिमी देशों पर बढ़ता सरकारी कर्ज उनकी संस्थाओं पर वैश्विक भरोसा कम करने का एक कारण बना है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अस्थिरता की जड़ें उस बदलाव में हैं, जिसमें दुनिया एक ऐसी व्यवस्था से आगे बढ़ रही है जो कुछ चुनिंदा देशों के हितों की सेवा करती थी और अब एक अधिक जटिल, बंटी हुई तथा बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
पुतिन ने कहा, रूस इन वैश्विक परिवर्तनों को केवल खतरे के रूप में नहीं देखता, बल्कि इन्हें बड़े अवसरों के रूप में भी देखता है। इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए हम तेजी और व्यावहारिक तरीके से काम करना चाहते हैं।
यह आर्थिक मंच ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब यूक्रेन संघर्ष के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। बजट घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए रूसी सरकार ने करों में बढ़ोतरी की है और घरेलू स्तर पर अधिक कर्ज लिया है।
पुतिन लंबे समय से सेंट पीटर्सबर्ग आर्थिक मंच का उपयोग रूस की आर्थिक उपलब्धियों को दिखाने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए करते रहे हैं। इस मंच की तुलना अक्सर विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) से की जाती है, जो हर साल स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होता है।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन 2036 तक सत्ता में बने रहने की अपनी संभावित योजना से जुड़े सवाल का सीधा जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि इस बारे में बात करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। केवल ईश्वर ही जानता है कि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के अंत तक उनका स्वास्थ्य कैसा रहेगा। 73 वर्षीय पुतिन 1999 से सत्ता में बने हुए हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 2036 तक पद पर बने रहेंगे, तो पुतिन ने कहा, मैं अगले चुनावों के बारे में नहीं सोचता। केवल ईश्वर ही जानता है कि मेरा स्वास्थ्य कितना साथ देगा। क्या मैं, आप और यहां मौजूद सभी लोग कल, परसों या उससे आगे तक स्वस्थ रहेंगे और क्या हम उन जिम्मेदारियों को पूरा कर पाएंगे तथा उन लक्ष्यों को हासिल कर पाएंगे जो हमने तय किए हैं, यह कोई नहीं जानता।
2024 में छह साल के कार्यकाल के लिए दोबारा राष्ट्रपति चुने गए पुतिन ने कहा कि रूसी संविधान उन्हें 2030 में होने वाले अगले राष्ट्रपति चुनाव में फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, संविधान के अनुसार मैं 2036 तक फिर से चुना जा सकता हूं। लेकिन इस बारे में बात करना अभी बहुत जल्दी है। मैं पूरी ईमानदारी से कह रहा हूं कि मैं अभी इसके बारे में सोच भी नहीं रहा हूं।
1999 से सत्ता में बने हुए हैं पुतिन
- व्लादिमीर पुतिन 1999 से 2000 तक रूस के प्रधानमंत्री रहे।
- पुतिन वर्ष 2000 में वह पहली बार चार साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुने गए और 2004 में फिर से राष्ट्रपति बने।
- वर्ष 2008 से 2012 तक उन्होंने दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में काम किया।
- 2008 में राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल कर दी गई थी।
- पुतिन 2012 में फिर राष्ट्रपति चुने गए और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।
भारत पर दबाव की कोशिश में अमेरिका, लेकिन मोदी पर दबाव बनाना नामुमकिन: पुतिन
इससे एक दिन पहले पुतिन ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि रूस के साथ जब भी सहयोग की बात आती है, पश्चिम भारत पर दबाव डालने की कोशिश करने लगता है। लेकिन हर कोई जानता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक और नामुमकिन है। पुतिन ने भारत को रूस का बेहद भरोसेमंद साझेदार करार देते हुए कहा कि अमेरिका का भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव पूरी तरह विफल रहा है।







