वाशिंगटन। साल 2025 में शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली वेनेजुएला की नेता मारिया मचादो द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना प्राइज ट्रांसफर करने पर नोबेल कमेटी का बड़ा बयान सामने आया है। नोबेल फाउंडेशन ने कहा कि हमारा एक मुख्य उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों की गरिमा और उनकी प्रशासनिक प्रक्रिया की रक्षा करना है। फाउंडेशन अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत और उसके प्रावधानों का सख्ती से पालन करता है। वसीयत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिए जाएंगे जिन्होंने “मानवजाति को सबसे बड़ा लाभ पहुंचाया हो”।
Statement from the Nobel Foundation
One of the core missions of the Nobel Foundation is to safeguard the dignity of the Nobel Prizes and their administration. The Foundation upholds Alfred Nobel’s will and its stipulations. It states that the prizes shall be awarded to those who… pic.twitter.com/WIadOBLtpD
— The Nobel Prize (@NobelPrize) January 18, 2026
कमेटी ने कहा कि यह भी निर्धारित किया गया है कि प्रत्येक पुरस्कार किस संस्था या समिति को प्रदान करने का अधिकार है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में नोबेल पुरस्कार को चाहे प्रतीकात्मक रूप से ही क्यों न हो हस्तांतरित नहीं किया जा सकता, न ही इसे आगे वितरित किया जा सकता है। पुरस्कार की मूल प्रकृति, उसकी गरिमा और अल्फ्रेड नोबेल की इच्छा के अनुसार, यह केवल मूल प्राप्तकर्ता को ही प्रदान किया जाता है और इसका कोई विभाजन या पुनर्वितरण संभव नहीं है।
पुरस्कार की वैधता को सम्मान जरूरी : फाउंडेशन इस सिद्धांत पर अडिग है कि नोबेल पुरस्कारों की पवित्रता और उनकी एकलता को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। यह नियम न केवल पुरस्कार की वैधता को बनाए रखता है, बल्कि मानवता के लिए उनके योगदान को भी सम्मान देता है। यह बयान नोबेल पुरस्कारों की अखंडता और ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के लिए जारी किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी भ्रम या गलत व्याख्या से बचा जा सके। नोबेल पुरस्कार मानव सभ्यता के सर्वोच्च सम्मानों में से एक हैं और उनकी गरिमा को हर हाल में संरक्षित रखना फाउंडेशन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।







